पाटन । ग्राम पंचायत मोतीपुर में पाहंदा मार्ग पर उचित मूल्य की दुकान के पास स्थित शासकीय भूमि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ग्राम के ही एक व्यक्ति ने उक्त शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे दूसरे व्यक्ति को अधिक कीमत पर बेच दिया। अब इसी जमीन पर निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा है, वह शासकीय भूमि है। इसके बावजूद कथित रूप से बिना वैध अनुमति के निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शासकीय जमीन पर कब्जा होने के बाद उस पर निर्माण की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई।
कब्जे के बाद बिक्री, फिर निर्माण
बताया जा रहा है कि पहले शासकीय भूमि पर कब्जा किया गया और बाद में इसे दूसरे व्यक्ति को कथित रूप से ऊंची कीमत पर बेच दिया गया। अब जमीन पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यदि भूमि वास्तव में शासकीय है तो उसके हस्तांतरण या बिक्री का अधिकार किसी निजी व्यक्ति को कैसे मिला, यह जांच का विषय है।
कार्रवाई की बजाय निर्माण जारी रहने पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासकीय भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण की जानकारी संबंधित विभाग एवं स्थानीय प्रशासन को होने के बावजूद निर्माण कार्य कैसे आगे बढ़ रहा है। यदि निर्माण अवैध है तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराने और शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
राजस्व विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। भूमि की वास्तविक स्थिति, खसरा रिकॉर्ड, सीमांकन तथा कथित कब्जे और बिक्री की प्रक्रिया की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में स्थल निरीक्षण और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।








