नई दिल्ली। बांग्लादेश (Bangladesh) में राजनीतिक और प्रशासनिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में चल रही सरकार को एक के बाद एक कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने कामकाज ठप कर दिया है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक जगत भी गंभीर आर्थिक संकट की चेतावनी दे रहा है।

सचिवालय में लगातार प्रदर्शन, राजस्व विभाग ठप

रविवार को लगातार दूसरे दिन राजधानी ढाका स्थित बांग्लादेश सचिवालय में सैकड़ों सरकारी कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रस्तावित “सरकारी सेवा (संशोधन) अध्यादेश, 2025” के खिलाफ है, जिसे प्रदर्शनकारी ‘काला कानून’ बता रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह अध्यादेश सरकारी अफसरों को मनमाने ढंग से बर्खास्त करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की खुली छूट देता है।

वहीं, राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) के अधिकारी भी विरोध में शामिल हो गए हैं और उन्होंने सोमवार से सभी प्रकार के आयात-निर्यात कार्य अनिश्चितकाल के लिए रोकने की घोषणा की है। इसका असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

प्राथमिक शिक्षक भी हड़ताल पर

सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक भी सोमवार से अनिश्चितकालीन कामबंदी पर चले गए हैं। वे अपने शुरुआती वेतन को राष्ट्रीय वेतनमान के 11वें ग्रेड के बराबर किए जाने की मांग कर रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में कामबंदी के चलते देश भर के लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

व्यापारिक समुदाय की चिंता गहराई

बांग्लादेश (Bangladesh) टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि देश तेजी से आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में उत्पादन ठप है, बेरोजगारी बढ़ रही है और वेतन देने के लिए धन नहीं बचा। ईद-उल-अजहा से पहले श्रमिकों को वेतन और बोनस देना मुश्किल हो रहा है।

रसेल ने यह भी कहा कि विदेशी निवेशक बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति को देखकर पीछे हट रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि भारत और वियतनाम जैसे देश निवेश के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन चुके हैं।

चुनाव को लेकर भी अनिश्चितता

मोहम्मद यूनुस ने पहले दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन अब उनका कहना है कि चुनाव जून 2026 तक कराए जाएंगे। यह बदलाव राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक दबाव का संकेत देता है।

यूनुस ने कहा, “बांग्लादेश युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है। अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं।”

देश में हालात चिंताजनक

वर्तमान स्थिति में बांग्लादेश में प्रशासनिक कामकाज, शिक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सभी ठप होने की कगार पर हैं। एक ओर हड़तालों की बाढ़ है, दूसरी ओर सरकार के पास वेतन और संचालन के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।

यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।

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