@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बड़े बदलाव के तहत राज्यभर की शाला विकास एवं प्रबंधन समितियों (SMDC) को भंग कर नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) गठित करने का निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था में राजनीतिक नियुक्तियों की परंपरा समाप्त कर दी गई है और समिति की कमान सीधे अभिभावकों को सौंपी जाएगी।
नई गाइडलाइन के अनुसार समिति के कुल सदस्यों में 75 प्रतिशत माता-पिता या अभिभावक होंगे, जबकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद भी अभिभावकों के बीच से चुने जाएंगे। इससे अब स्थानीय नेताओं, विधायकों या राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी।
एक माह के भीतर होगा गठन
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। प्राथमिक से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के एक महीने के भीतर नई समितियों का गठन करना अनिवार्य होगा।
छात्र संख्या के आधार पर तय होंगे सदस्य
नई एसएमसी में सदस्य संख्या स्कूल में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार निर्धारित होगी—
- 100 तक विद्यार्थियों वाले स्कूल : 12 से 15 सदस्य
- 100 से 500 विद्यार्थियों वाले स्कूल : 15 से 20 सदस्य
- 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल : 20 से 25 सदस्य
समिति में एक शिक्षक, स्थानीय निकाय का निर्वाचित प्रतिनिधि, पूर्व छात्र, स्थानीय शिक्षाविद्, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता अथवा एएनएम को भी सदस्य बनाया जाएगा। स्कूल के प्राचार्य सदस्य सचिव होंगे।
अब एक लाख रुपये तक के कार्यों की मंजूरी स्वयं दे सकेगी समिति
नई व्यवस्था के तहत एसएमसी को वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। विद्यालय में एक लाख रुपये तक के निर्माण और मरम्मत कार्यों का निर्णय समिति स्वयं कर सकेगी, जिसके लिए अलग से विभागीय स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
इन कार्यों में शौचालय, पेयजल व्यवस्था, बिजली, छोटी-मोटी मरम्मत तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल होंगे। एक लाख रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों के लिए वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।
सिर्फ भवन नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता पर भी होगी निगरानी
नई एसएमसी की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होगी। समिति को—
- प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक आयोजित करनी होगी।
- विद्यार्थियों के नियमित नामांकन और उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
- स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करना होगा।
- नामांकन अभियान में सहयोग करना होगा।
- अभिभावक-शिक्षक बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।
- पीएम पोषण (मिड-डे मील) और स्वास्थ्य गतिविधियों की निगरानी करनी होगी।
- स्कूल विकास योजना तैयार करनी होगी।
- बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करना होगा।
- अनुदान राशि के उपयोग की निगरानी करनी होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बड़ा बदलाव
केंद्र सरकार द्वारा जारी SMC Guidelines-2026 के अनुरूप यह व्यवस्था लागू की जा रही है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत स्कूल प्रबंधन में समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने तथा जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। देशभर के लगभग 15 लाख विद्यालयों में इसी मॉडल को लागू करने की तैयारी की गई है।
राजनीतिक हस्तक्षेप पर लगेगा अंकुश
अब तक अधिकांश स्थानों पर शाला विकास समितियों में अध्यक्ष और पदाधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव के आधार पर होती रही है। नई व्यवस्था से इस पर रोक लगेगी और स्कूलों के संचालन में सीधे अभिभावकों की भागीदारी बढ़ेगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
मुख्य बातें एक नजर में
✔ शाला विकास समितियां भंग, नई SMC का गठन
✔ 75% सदस्य होंगे माता-पिता या अभिभावक
✔ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी अभिभावकों में से चुने जाएंगे
✔ नेताओं की नियुक्ति और राजनीतिक दखल खत्म
✔ 1 लाख रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार
✔ हर महीने बैठक अनिवार्य
✔ बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और उपस्थिति पर रहेगी निगरानी
✔ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत लागू होगी नई व्यवस्था
इस बदलाव को सरकारी स्कूलों के प्रबंधन में राजनीतिक प्रभाव से जनभागीदारी की ओर बढ़ाया गया सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।








