@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने सोमवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, खाद संकट और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पूरी तरह विफल साबित हुई है तथा जनता हर स्तर पर परेशान है।
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में खंड वर्षा से खेती प्रभावित हुई है, लेकिन किसानों को राहत देने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल खुलने के कई सप्ताह बाद भी अनेक विद्यार्थियों को बस्ता और ड्रेस नहीं मिली है तथा शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है।
बिजली व्यवस्था पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से मनमानी वसूली की जा रही है। उनका आरोप था कि बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी से आम जनता में आक्रोश है और कई स्थानों पर स्मार्ट मीटर के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था से मीटर रीडरों की नौकरियों पर भी संकट खड़ा हो गया है।
खाद संकट का मुद्दा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएपी और यूरिया की भारी कमी से किसान परेशान हैं तथा कालाबाजारी के कारण उन्हें दोगुने-तिगुने दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की।
नीट परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार को झुकना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की जा रही है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर में मलेरिया और डायरिया के बढ़ते मामलों तथा कांकेर में हुई मौतों से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की हाट बाजार क्लीनिक और शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना बंद कर दी गई, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के गरीब और आदिवासी मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
भूपेश बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों की मूल व्यवस्था कमजोर कर दी गई है और वहां फीस वसूली शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से किसान, छात्र, युवा, कर्मचारी और आम जनता सभी वर्ग प्रभावित हैं तथा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।








