संवाददाता तुकाराम कंसारी
धर्म ध्वजा फहरते ही गूंज उठा पूरा नगर – 72 सुहागिनों के मंगल कलश यात्रा ने मोहा मन
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। नगर के ऐतिहासिक श्री राधाकृष्ण मंदिर के शताब्दी महोत्सव के तहत आज यज्ञशाला के ऊपर धर्म ध्वजा फहराने के साथ ही वृहद विष्णु महायज्ञ का भव्य आरंभ हुआ। आध्यात्मिक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर यह आयोजन देखने हजारों भक्त एकत्र हुए।
72 सुहागिनों की मंगल-कलश यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
त्रिवेणी संगम से 72 सुहागिन महिलाओं द्वारा मंगल कलश लाने की परंपरा थी, परंतु नगर की आस्था इतनी प्रबल थी कि 72 से अधिक मातृशक्ति स्वयं ही लाल-पीली साड़ी एवं सोलह श्रृंगार में सजधज कर उपस्थित हो गईं।
भाव-विभोर दृश्य यह था कि माताएं स्वयं ही एक-दूसरे के चरणों में आलता लगा रहीं थीं। ढोल–नगाड़ों की थाप पर जब वे कतारबद्ध होकर त्रिवेणी संगम की ओर बढ़ीं तो वातावरण “जय श्रीहरि” के जयकारों से गूंज उठा।
त्रिवेणी तट पर उपस्थित 21 विद्वान ब्राह्मणों ने शुभ मुहूर्त देखकर मां गंगा का पूजन किया और जल भरने हेतु वैदिक मंत्रोच्चार किया।
बाएँ ओर राजीव लोचन मंदिर तो दाएँ कुलेश्वर महादेव का दिव्य दर्शन—मनोहारी दृश्य ऐसा था मानो देवगण भी आकाश से यह पवित्र क्षण निहार रहे हों।
यज्ञशाला में दिव्यता, भव्यता और अनुपम श्रद्धा
मंगल-कलश लिए मातृशक्ति जब ढोल बाजों की थाप के साथ यज्ञ स्थल पहुँची तो परिक्रमा के पश्चात यजमान नयन निधि अग्रवाल और प्रतीक पूजा अग्रवाल को विधि-विधान से यज्ञशाला में प्रवेश कराया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद वैदिक नियमों का पालन—भक्ति की दृढ़ता का प्रतीक बना।
यज्ञ स्थल के समीप कामधेनु रूपी गौ माता की उपस्थिति आयोजन की पवित्रता को और बढ़ा रही थी। यज्ञशाला का पूरा प्रांगण झंडों, तोरण, झालरों और रोशनी से ऐसा सजा कि दृश्य किसी आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं—मानो पूरा नगर वृंदावन धाम बन उठा हो।
भक्तों की सेवा भावना प्रशंसनीय
सैकड़ों श्रद्धालु स्थल पर जुटे थे। किसी व्यवस्था की जरूरत पड़ते ही भक्त स्वयं दौड़ पड़ते—हर कोई सेवा का सौभाग्य पाना चाहता था। भक्तों के चेहरे पर गर्व था कि उन्हें इस अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव का साक्षी बनने का अवसर मिला है।
हजारों आहुतियों से गूंजेगा वायुमंडल – फैलेगी दिव्य सुगंध
आज से शुरू होकर प्रतिदिन शुद्ध घी की हजारों आहुतियाँ डाली जाएंगी, जिससे वातावरण में दिव्य सुगंध और आत्मिक शांति फैलने लगेगी। मान्यता है कि विष्णु महायज्ञ के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
सेठ रेखराज चतुर्भुज अग्रवाल एवं उनके पूर्वजों को आज श्रद्धा से स्मरण किया गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वे स्वर्ग से अपने वंशजों को आशीर्वाद दे रहे होंगे।
इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा यह आयोजन
मंदिर ट्रस्ट के सर्वराकार मोहनलाल, ट्रस्टी गोपाल, गिरधारी अग्रवाल सहित समिति के सदस्यों ने जिस भव्यता से आयोजन किया है, वह न केवल नगर बल्कि पूरे अंचल का गौरव बढ़ाने वाला है। यह आयोजन आने वाले समय में इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।
30 नवंबर तक चलेगा विष्णु महायज्ञ — देशभर से आएंगी भक्ति-कलाओं की टीमें
- 30 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 7:30 से दोपहर 1:30 बजे तक यज्ञ की विधि संपन्न होगी।
- 28 नवंबर से उज्जैन, वृंदावन, दिल्ली सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से कला-मंडलियां धार्मिक प्रस्तुतियाँ देने पहुंचेंगी।
पूरे नगर और मंदिर परिसर को झंडों, तोरण द्वारों, झालर लाइट, फ्लेक्स और सजावट से जगमगाया गया है—हर दिशा से उमड़ता भक्तिभाव इस महोत्सव को अद्भुत बना रहा है।
