संवाददाता तुकाराम कंसारी

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर। अग्रणी सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था वक्ता मंच की ओर से राजधानी रायपुर के वृन्दावन सभागृह में भव्य देशभक्ति पूर्ण काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गणेशोत्सव की ऐतिहासिक परंपरा से प्रेरित इस कार्यक्रम में रायपुर, दुर्ग, सिमगा, राजिम और बेमेतरा से आए 60 से अधिक कवियों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा में ओजस्वी काव्य पाठ कर सभागृह को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार पं. पी.के. त्रिपाठी रहे, अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री शुभा शुक्ला ‘निशा’ ने की तथा वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार धर द्विवेदी और समाजसेविका ज्योति शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। आयोजन का प्रभावी संचालन मंच अध्यक्ष राजेश पराते ने किया, जबकि संयोजन एवं आभार प्रदर्शन शुभम साहू द्वारा किया गया। इस अवसर पर नवोदित रचनाकार सम्मान से राजेश शर्मा और करण बघेल को सम्मानित किया गया।

कविताओं में छलकी शहादत और देशप्रेम

गोष्ठी की शुरुआत आदित्य बर्मन “आजाद” की पंक्तियों से हुई–
“मैं दीवाना हूँ शहीदों का, वीरों की पुकार लिखूंगा,
छोड़कर महबूबा की कलाई, हाथों में हो तलवार लिखूंगा।”
इस ओजस्वी प्रस्तुति ने सभागृह में देशप्रेम की ज्वाला जगा दी।

शिवानी मैत्रा ने कहा—
“जिनकी वजह से लिखी गई आज़ाद भारत की कहानी,
आज हम सब याद करें ऐसे वीरों की कुर्बानी।”

मधु तिवारी की कविता में वीर जवानों का त्याग झलका, तो विरेंद्र शर्मा ‘अनुज’ ने गर्जना की—
“हमारा हर जवां मरने को अब तैयार बैठा है,
कफ़न बांधे हुए हाथों में ले तलवार बैठा है।”

आरव शुक्ला ने अपने जोशीले शब्दों से सभागृह को तिरंगे की रक्षा के संकल्प से बाँध दिया।

देशभक्ति की सुरमयी शाम

रात देर तक चली इस काव्य गोष्ठी में 62 कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर पी.के. त्रिपाठी, शुभा शुक्ला, राजकुमार धर द्विवेदी, ज्योति शुक्ला, राजेश पराते, शुभम साहू, घासी राम रात्रे, गंगाशरण पासी, कमल सूर्यवंशी, डॉ. कमल वर्मा, वीरेंद्र शर्मा ‘अनुज’, अर्चना श्रीवास्तव, मोहित कुमार शर्मा, सूर्यकांत देवांगन ‘प्रचंड’, शायर रवि, आदित्य बर्मन ‘आजाद’, आरव शुक्ला सहित अनेक कवियों की गूंज ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण था संस्था की संरक्षिका ज्योति शुक्ला का जन्मदिन, जिसे पूरे उत्सव में मनाया गया।

समापन में गूँजा एक स्वर

पूरे कार्यक्रम में कवियों ने वीरता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश दिया। वृन्दावन सभागृह देर रात तक “जय हिंद” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंजता रहा।

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