संवाददाता तुकाराम कंसारी

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। 14जनवरी बुधवार को अपराह्न 3 बजकर 5मिनट पर सूर्य ने धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर लिया है, अब सूर्य नारायण उत्तरायण हो गए हैं, ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि इस बार बड़ा अद्भुत संयोग बना कि मकर संक्रांति षट्तिल एकादशी के दिन पड़ी, इसलिए आम आस्थावान लोग असमंजस में भी रहे कि एकादशी के दिन खिचड़ी आदि का दान कैसे करें, पर समाज के बुजुर्गों और विद्वानों ने समाधान दिया कि तिल, तिल से बनी मिठाइयां, गुड़, कम्बल एवं अन्यान्य खाद्य वस्तुओं का दान भी दिया जा सकता है, मकर संक्रांति का पुण्यकाल बुधवार को दोपहर 3 बजकर 5मिनट से लेकर सूर्यास्त तक रहा, जिसमे लोगों ने मन्दिरों में जाकर देव दर्शन किए एवं दान आदि किया, स्नान दान की महिमा को देखते हुए आज गुरुवार को भी लोग दान पुण्य कर रहे हैं।

संक्रान्ति के दिन लोग संक्रांति का फल श्रवण करते हैं और ब्राह्मणों को नए वर्ष का पंचांग, दक्षिणा आदि देकर सम्मान भी करते हैं संक्रांति का फल निरूपण करते हुए ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि इस बार संक्रांति कुमारी अवस्था में, व्याघ्र पर बैठकर खीर खाती हुई पश्चिम दिशा की ओर गई है, शास्त्र कहते हैं कि संक्रांति जिन वस्तुओं को धारण व भक्षण करती है उनकी हानि, व्यापारियों को पीड़ा, जहां से आती है वहां सुख और जिधर जाती है और देखती है वहां कष्ट होता है, इस बार संक्रांति मिथुन, कन्या, मकर और कुम्भ राशि वालों के लिए शुभ एवं शेष राशियों के लिए अशुभ है, संक्रांति फल श्रवण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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