संवाददाता तुकाराम कंसारी 

नवापारा में संत निरंकारी मिशन का भव्य संत समागम सम्पन्न, हजारों भक्त हुए भाव-विभोर

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा-राजिम। संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में गत दिवस कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित भव्य संत समागम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। मिशन के राजपिता श्री रमित ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि “प्रेमा भक्ति में प्रेम का जिक्र केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि भक्तों के जीवन में व्यवहार और आचरण से प्रकट होना चाहिए।”

उन्होंने निरंकारी माता सविंदर के जीवन को आदर्श बताते हुए कहा —
“भक्ति का उसूल है — ‘तू कुबूल से, तो तेरा किया सब कुबूल है’। ईश्वरीय प्रेम केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का रूप बन जाना चाहिए। जहां प्रेम है, वहां केवल प्रीतम का स्मरण होता है, वहां अक्ल की नहीं, हृदय की सुनाई देती है।”

राजपिता ने मीरा, शबरी और कबीर जैसे संतों के उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची भक्ति गुरु के साथ केवल प्रेम का बंधन है, जिसमें कोई स्वार्थ या गणना नहीं होती। उन्होंने मजनू-लैला के प्रेम का प्रसंग सुनाते हुए स्पष्ट किया कि “भक्त का प्रेम भी ऐसा होना चाहिए जो केवल गुरु में ही बसे और किसी ओर न जाए।”

भक्ति का सार और वर्तमान समाज पर दृष्टि:

राजपिता ने कहा —
“आज संसार में ईश्वर का नाम अधिकतर सांसारिक सुख पाने के लिए लिया जा रहा है, प्रभु की प्राप्ति के लिए नहीं। जब तक जीवन का मुख्य उद्देश्य प्रभु-प्राप्ति नहीं होगा, तब तक मनुष्य पूर्ण नहीं हो सकता। सच्चा भक्त वही है जिसका हृदय ‘परहित सरस धरम’ से भरा हो, और जिसमें पीड़ा के प्रति संवेदनशीलता हो।”

उन्होंने बताया कि सतगुरु अपनी लीला से भक्तों को सदैव निहाल करते रहते हैं, और यह आशीर्वाद हर उस भक्त पर होता है जो प्रेमा भक्ति की राह पर चलता है।

भक्तों की विशाल सहभागिता: 

इस संत समागम में दुबई, बैंगलुरु समेत दूर-दराज़ क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं सहित हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। समागम का संचालन मिशन के ज़ोनल इंचार्ज गुरबक्श सिंह कालरा ने किया और अंत में उन्होंने सभी प्रभु-प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

भक्ति, प्रेम और गुरु के प्रति समर्पण का यह अनूठा संगम नवापारा की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना में नई ऊर्जा का संचार कर गया।

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