@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर/धमतरी। छत्तीसगढ़ के सर्वमान्य हास्य व्यंग्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे जी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके व्यंग्य की प्रासंगिकता साहित्य में सदियों नहीं अविस्मरणीय रहेगी। स्व. दुबे जी ने छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक विरासत को न सिर्फ समृद्ध किया अपितु वैश्विक पटल पर छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़ के संस्कृति-परंपराओं को पहचान दिलाई। हास्य व्यंग्य के माध्यम से जनता के तपन, पीड़ा और संत्रास को स्पष्टता बेबाकी और सहजता से कह पाने की अद्भुत कला स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे में रही। उक्त उद्गार अनुराग साहित्य एवं कला संस्था कठौली के सौजन्य से जोगी बाबा आश्रम कठौली में आयोजित शोकसभा को संबोधित करते हुए उपस्थित साहित्यकारों ने दी।
अनुराग साहित्य एवं कला संस्था द्वारा आयोजित शोकसभा में साहित्यकारों ने दुबे जी के साथ अपने जीवंत संस्मरण को साझा करते हुए उनके अप्रतिम व्यक्तित्व का स्मरण किया गया। इस अवसर पर संगवारी साहित्य समिति से कवि रामेश्वर साहू, मधुर मिलन साहित्य समिति से सतीश शर्मा, मोहन कंसारी, अनुराग साहित्य एवं कला संस्था से प्रशांत सोनवानी, कु. जागृति साहू सहित उपस्थित साहित्यकारों ने शोक सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर राजकुमार निषाद, यशोदा साहू, मुकेश निषाद, अवधराम निषाद, रामा राम, लोकेश निषाद सहित स्थानीय जन उपस्थित रहे। शोकसभा का संचालन कवि सतीश शर्मा एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार अनुराग साहित्य एवं कला संस्था के अध्यक्ष प्रशांत सोनवानी ने किया।
