संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। छत्तीसगढ़ की धर्म नगरी राजिम, जिसे प्रयाग के नाम से भी जाना जाता है, में सावन माह के पहले दिन त्रिवेणी संगम के बीच स्थित पौराणिक श्री कुलेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पैरी, सोंढूर और महानदी के पवित्र संगम पर बने इस ऐतिहासिक मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और पूजन के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सावन के प्रथम दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। भगवान कुलेश्वर नाथ का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री से महादेव की आराधना की गई। मंदिर परिसर को फूलों और रंगोली से सजाया गया, जिसने भक्ति के माहौल को और भी मनोरम बना दिया। स्थानीय पंडितों के अनुसार, श्री कुलेश्वर नाथ मंदिर का संबंध रामायण काल से है। मान्यता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। यह मंदिर आठवीं सदी की स्थापत्य कला का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सावन माह में इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आज के दिन शिववास योग होने के कारण पूजा का विशेष महत्व था। भक्तों ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और अन्य अनुष्ठानों के साथ भगवान शिव की आराधना की। एक श्रद्धालु ने बताया, “सावन में कुलेश्वर नाथ जी के दर्शन से मन को शांति और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।” मंदिर समिति ने बताया कि सावन माह के दौरान चार सोमवार व्रत और अन्य पर्वों के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। कांवड़ यात्रा के लिए भी व्यवस्थाएं जोरों पर हैं। मंदिर के आसपास भक्ति और उत्साह का माहौल है, जो सावन के पूरे महीने तक बना रहेगा।
