संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा। गणेश चतुर्थी का पावन पर्व नजदीक आते ही शहर के मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में दिन-रात रौनक बनी हुई है। श्रद्धा और भक्ति के साथ-साथ इस बार महंगाई की मार भी मूर्तिकारों और खरीदारों दोनों को महसूस हो रही है।
11 दिनों तक चलने वाले इस भव्य उत्सव के लिए मंगलमूर्ति श्री गणेश की स्थापना की तैयारियां जोरों पर हैं। स्थानीय समितियां और श्रद्धालु अप्रैल-जून से ही मूर्तिकारों को अग्रिम ऑर्डर देकर अपनी पसंदीदा प्रतिमाएं बुक करा रहे हैं, ताकि समय पर मूर्तियां तैयार हो सकें।
स्थानीय मूर्तिकार लोकेश चक्रधारी ने बताया कि मूर्ति निर्माण का कार्य 3 से 4 महीने पहले ही आरंभ हो जाता है। इस वर्ष वे 45 बड़ी मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं, जिनके ऑर्डर दुर्ग, भिलाई और रायपुर जैसे शहरों से भी मिले हैं। मूर्तियों की कीमत 500 रुपये से लेकर 18,000 रुपये तक है, लेकिन कच्चे माल, रंग और सजावटी सामान की बढ़ी कीमतों ने लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है।
चक्रधारी ने कहा, “गणेश चतुर्थी सिर्फ व्यवसाय नहीं, यह आस्था और कला का संगम है। हम पूरी श्रद्धा के साथ मंगलमूर्ति को आकार देते हैं, ताकि भक्तों के घर और पंडाल में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।”
गणेश उत्सव के करीब आते ही बाजारों में सजावटी सामग्री, पंडाल निर्माण और संगीत की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इस बार महंगाई भले चुनौती बनकर सामने हो, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं है, और नवापारा से लेकर बड़े शहरों तक गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजने को तैयार हैं।
