संवाददाता तुकाराम कंसारी

गुणानुवाद सभा और भक्ति भजनों से गुंजा दादाबाड़ी परिसर

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा-राजिम। खरतर्गच्छ जैन परंपरा के दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरी महाराज का स्वर्गारोहण दिवस रविवार को स्थानीय जैन समाज ने श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया। इस अवसर पर जैन श्रीसंघ द्वारा गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने गुरुदेव को भावसुमन अर्पित किए।

सभा में स्वाध्यायी कुशल चोपड़ा ने गुरुदेव के जीवन व योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिनचन्द्रसूरी महाराज का जन्म संवत 1197 भाद्रपद शुक्ल में विक्रमपुर (राजस्थान) में हुआ था। संवत 1203 में आपने प्रथम दादा गुरु जिनदत्तसूरी महाराज से दीक्षा ली और संवत 1205 में आचार्य पदवी प्राप्त की। आपने धर्मप्रभावना में अमूल्य योगदान दिया और दिल्ली के महाराणा सहित अनेक शासकों को धर्मोपदेश देकर मार्गदर्शन किया। दिल्ली में चातुर्मास के दौरान ही आपने महाप्रयाण किया। आपकी स्मृति में दिल्ली, मेहरोली स्थित दादाधाम आज भी विश्वविख्यात है।

विशेष पूजा-अर्चना और भक्तिभाव का माहौल

गुरुदेव की स्मृति में स्थानीय दादाबाड़ी में विशेष पूजा-अर्चना आयोजित हुई। गुरुभक्त मंडल और जैन समाज के सदस्यों ने भक्ति भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उल्लेखनीय है कि गुरुभक्त मंडल द्वारा अनवरत रूप से चल रहा दादा गुरु इक्तीला पाठ रविवार को 1239वें दिन में प्रवेश कर गया।

प्रवचन और तपस्या का आयोजन

गुणानुवाद सभा में ऋषभचंद बोथरा ने अहोभाव से कल्पसूत्र स्वाध्यायी वीरेन्द्र मुथा को समर्पित किया। श्री मुथा ने प्रवचन में भगवान महावीर के 27 भवों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में आयोजित एकासणा तपस्या का लाभ लालचंद भागचंद बंगानी परिवार ने लिया।

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