संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, गोबरा-नवापारा। छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के स्वाभिमान, मान-सम्मान और सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ, नवापारा राजिम में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (सीकेएस) की एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक बैठक आयोजित हुई। यह आयोजन न केवल संगठन के स्थानीय विस्तार का माध्यम बना, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपरा और आम आदमी के हक-अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक हुंकार भी साबित हुआ।
बैठक की कमान संभाली छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के संस्थापक एवं जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष श्री अमित बघेल ने। अपने जोशीले संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा—
“छत्तीसगढ़ी अस्मिता को बचाना सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर छत्तीसगढ़िया का धर्म है। स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए संगठन का विस्तार समय की मांग है।”
श्री बघेल का नेतृत्व लंबे समय से संगठन की ताकत रहा है। वे लगातार भाजपा और कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों पर स्थानीय मुद्दों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए, हक-अधिकार की आवाज बुलंद करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने हरेली तिहार जैसी सांस्कृतिक रैलियों के जरिए छत्तीसगढ़ी लोककला और परंपराओं को नई पहचान दी है।
बैठक के प्रमुख मुद्दे :
- छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण
- बाहरी प्रभावों से स्थानीय अस्मिता की रक्षा
- किसानों के अधिकार और स्थानीय रोजगार के अवसर
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जनजागरण
बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि बाहरी प्रभावों और असंवेदनशील नीतियों से छत्तीसगढ़ी पहचान को खतरा है, और इसके खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
बैठक में प्रमुख उपस्थिति
प्रदेश संरक्षक दिनेश वर्मा, ललित बघेल (प्रदेश संरक्षक), तुषार वर्मा (अध्यक्ष, खंड खरोरा), टिकेश्वर निषाद (जिला अध्यक्ष, रायपुर), बदल देवांगन, धमेंद्र देवांगन, घनश्याम सोनकर, नंद सोनकर, शिव साहू, भोला निषाद, महेश निषाद, जय निषाद, जनक देवांगन, विनोद देवांगन, नरेश साहू, टीकम निषाद, पुन्नी निषाद, कृष्णा चक्रधारी, दद्दू निषाद, देव कहार, लीला राम निषाद, मोहन देवांगन, तोमु निषाद, देवेश निषाद, तरुण साहू, रोहित देवांगन सहित क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
भविष्य की दिशा
संगठन ने निर्णय लिया कि आने वाले समय में ऐसे जनजागरण कार्यक्रम लगातार होंगे, ताकि छत्तीसगढ़ी अस्मिता की आवाज पूरे प्रदेश में गूंजे। यह बैठक नवापारा राजिम क्षेत्र में एक नई सांस्कृतिक और राजनीतिक जागृति की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
