@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर। रायपुर के चंगोराभाठा स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ स्कूल में जब सालों बाद पुराने दोस्त मिले, तो माहौल हंसी, ठहाकों और यादों से गूंज उठा। यह कोई आम रियूनियन नहीं था, यह जश्न था उस अदम्य साहस का, जिसने शारीरिक चुनौतियों को बौना साबित कर दिया। इसी भीड़ में दो ऐसे हीरे भी थे, जिन्होंने दृष्टिबाधिता को हराकर न सिर्फ अपने लिए एक मुकाम बनाया, बल्कि आज वे सामान्य छात्रों को ज्ञान की रोशनी दे रहे हैं।

कोर्ट-कचहरी से लड़कर बनीं प्रोफेसर: भोजकुमारी की न्याय की जंग

रायगढ़ की भोजकुमारी पटेल की कहानी संघर्ष और जीत की एक मिसाल है। एक छोटी सी गलती ने उन्हें नौकरी से लगभग बाहर कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। भोजकुमारी बताती हैं, “मैं 2005 से 2013 तक इस स्कूल में पढ़ी। मैंने तीन बार NET क्वालिफाई किया। जब असिस्टेंट प्रोफेसर की वेकेंसी निकली, तो फॉर्म भरते समय साइबर कैफे वाले ने गलती से मेरी दिव्यांगता 40% से कम लिख दी।”
इस एक गलती के कारण उन्हें दिव्यांग श्रेणी का लाभ नहीं मिला। इसके बाद शुरू हुई डेढ़ साल की लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई। वह कहती हैं, “वह समय बहुत मुश्किल था। मैं चाहती हूं कि मेरे दुश्मन को भी कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें।” आखिरकार, बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और आज वह घरघोड़ा के सरकारी कॉलेज में राजनीति विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

युवाओं को संदेश: भोजकुमारी कहती हैं, “पूरी लगन से पढ़ें, लेकिन अपने दस्तावेजों का हमेशा ध्यान रखें। एक छोटी सी गलती भी आपकी जिंदगी में बड़ा तूफान ला सकती है।”

‘धृतराष्ट्र मेरे रोल मॉडल’, JNU-DU से पढ़कर बने प्रोफेसर: उत्तम वर्मा की कहानी

बलौदाबाजार के उत्तम वर्मा का आत्मविश्वास और ज्ञान आपको हैरान कर देगा। वह कहते हैं, “हमारे वंशज धृतराष्ट्र एक सफल राजा थे, मेरे रोल मॉडल वही हैं।” उत्तम ने अपनी स्कूलिंग इसी दिव्यांग स्कूल से की और टॉपर रहे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन, JNU से पोस्ट ग्रेजुएशन और पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की।

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए वह बताते हैं, “जब मैं हंसराज कॉलेज की पहली क्लास में गया, तो मुझे सिर्फ दो शब्द ‘स्टेट’ और ‘सोसायटी’ समझ आए। लगा मैं कहां आ गया हूं। लेकिन फिर मैंने कड़ी मेहनत की और खुद को उस माहौल में ढाला।” आज उत्तम वर्मा एक असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और सामान्य छात्रों को इतिहास पढ़ाते हैं। वह मानते हैं कि प्रकृति सबको बराबर शक्ति देती है, बस हमें उसका इस्तेमाल करना सीखना होता है। यह कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि इस बात की भी मिसाल हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो कोई भी बाधा आपका रास्ता नहीं रोक सकती।

Share.

Contact US

सतीश शर्मा
Editor in Chief


Mobile: 9893664533
Email: cglokdarshan@gmail.com
Address: ब्राह्मण पारा, नारी (कुरुद), जिला – धमतरी (छ.ग) 493663

Important Pages

Disclaimer

समाचारों की श्रृंखला में ‘छत्तीसगढ़ लोकदर्शन’ सबसे विश्वसनीय वेब न्यूज पोर्टल है, इसमें देश दुनिया की नवीनतम खबरों के साथ एक वैचारिक चिंतन भी है। ज्ञातव्य हो कि संवाददाताओं द्वारा भेजे गए समाचार की पुष्टि के लिए संपादक या पोर्टल किसी भी तरह उत्तरदायी नहीं है।

© 2025 cglokdarshan.com. Designed by Nimble Technology.

Exit mobile version