संवाददाता तुकाराम कंसारी 

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। धर्मनगरी राजिम और गोबरा नवापारा में सावन माह के कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर सावन झूला उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। यह क्षेत्र, जो प्रभु श्री राजीव लोचन जी और देवाधिदेव महादेव की पावन भूमि के रूप में विख्यात है, हरिहर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ के निवासियों और श्रद्धालुओं की भगवान श्री कृष्ण और भोले बाबा के प्रति गहरी आस्था और भक्ति का अनुपम संगम इस उत्सव में देखने को मिल रहा है। सावन माह की शुरुआत के साथ ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है, जो भगवान को झूला झूलाने और दर्शन करने के लिए उत्साहित हैं।

प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी सावन झूला उत्सव का आयोजन राजिम और गोबरा नवापारा के प्रमुख मंदिरों में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ शुरू हुआ है। यह उत्सव आगामी एकादशी तक अनवरत जारी रहेगा, जिसके दौरान भक्तों के लिए विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। राजिम के सुप्रसिद्ध श्री राजीव लोचन मंदिर, प्राचीन श्री राम मंदिर, छोटे श्री राजीव लोचन मंदिर, और गोबरा नवापारा के श्री राधा कृष्ण मंदिर, श्री सत्यनारायण मंदिर तथा श्री राम जानकी मंदिर में उत्सव की रौनक चरम पर है।
इस उत्सव का मुख्य आकर्षण है मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को सजाए गए सुंदर झूलों पर झुलाने की परंपरा। रंग-बिरंगे फूलों, चंदन, और सुगंधित सामग्रियों से सजे झूले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। श्रद्धालु भगवान को झूला झूलाते हुए भक्ति भजनों और कीर्तनों में डूबे हुए हैं, जिससे समूचा क्षेत्र हरिहर भक्ति के रंग में सराबोर हो गया है। मंदिर परिसरों में प्रतिदिन आयोजित होने वाले संगीतमय कार्यक्रम, जिसमें भक्ति भजनों, आरतियों और लोक संगीत की प्रस्तुतियाँ शामिल हैं, भक्तों के मन को मोह रही हैं।
स्थानीय मंदिर समितियों ने उत्सव को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत रखता है। सावन माह में भगवान शिव और श्री कृष्ण की भक्ति में लीन होने का यह अवसर भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

स्थानीय श्रद्धालु मनोज कंसारी ने बताया, “सावन झूला उत्सव हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यहाँ मंदिरों में भगवान को झूला झूलते देख मन को असीम शांति मिलती है।” वहीं, मंदिर समिति के एक सदस्य ने कहा, “हमारा प्रयास है कि प्रत्येक भक्त को बिना किसी असुविधा के दर्शन और उत्सव का आनंद लेने का अवसर मिले।यह उत्सव न केवल स्थानीय निवासियों, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। सावन के इस पावन माह में राजिम और गोबरा नवापारा का वातावरण भक्ति, संगीत और उत्साह से परिपूर्ण है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

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