उच्च शिक्षा में नवाचार व शोध संस्कृति को मजबूती देने का संकल्प

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, महासमुंद।

शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महासमुंद के राजनीति विज्ञान एवं हिंदी शोध केंद्र द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका “भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयाम” के द्वितीय संस्करण का विधिवत विमोचन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर करुणा दुबे के कर कमलों से हुआ। शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में महाविद्यालय के इस प्रयास की व्यापक सराहना हुई।

शोध समिति के विद्वान प्राध्यापक रहे उपस्थित

कार्यक्रम में शोध संवर्धन समिति की पत्रिका संपादक डॉ. मालती तिवारी, सह-संपादक डॉ. रीता पांडे, डॉ. नीलम अग्रवाल, डॉ. दुर्गावती भारती, तथा कंप्यूटर साइंस विभाग के डॉ. अजय कुमार देवांगन सहित सभी शोध निर्देशक और संकाय प्रमुख उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि यह पत्रिका रिसर्च जर्नल ऑफ सोशल एंड लाइफ साइंसेज सेंटर फॉर रिसर्च स्टडीज की मुख्य शोध पत्रिका है, जो मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1973 के अंतर्गत पंजीकृत है तथा 7.0 इंपैक्ट फैक्टर के साथ एसएसएन 0937-3914 में सूचीबद्ध है।

शोध प्रकाशन व लेखन पर विशेष व्याख्यान

पत्रिका विमोचन के साथ शोध लेखन पर केंद्रित एक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन भी किया गया।

प्राचार्य प्रो. करुणा दुबे ने शोध समिति को बधाई देते हुए कहा कि “उच्च शिक्षा का वास्तविक स्वरूप शोध और नवाचार से ही प्रतिष्ठित होता है। एनईपी में शोध को विशेष महत्व दिया गया है, ऐसे में प्राध्यापक व शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।”

उन्होंने छात्रों व शोधार्थियों को वैज्ञानिक सोच के साथ लेखन का अभ्यास विकसित करने प्रेरित किया।

डॉ. नीलम अग्रवाल ने साहित्यिक पुनरावलोकन (लिटरेचर रिव्यू) के उद्देश्य व महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ. दुर्गावती भारती ने शोध शब्द की व्युत्पत्ति और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पक्षों को संदर्भित करते हुए कहा कि शोध का अर्थ है—परिष्करण, छानबीन और सत्य की खोज।

डॉ. अजय देवांगन ने पीपीटी के माध्यम से प्लेगियरिज्म तथा शोध में आवश्यक सावधानियों को सरल भाषा में समझाया।

डॉ. जगदीश सत्यम ने रिसर्च पेपर लेखन की चरणबद्ध प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया।

37 शोध पत्रों वाला समृद्ध अंक

संपादक डॉ. मालती तिवारी के निर्देशन में प्रकाशित खंड 2 में कुल 37 शोध पत्र शामिल किए गए हैं। इस संस्करण में विभिन्न महाविद्यालयों के 60 शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों की सहभागिता रही।

मुख्य संपादक डॉ. अखिलेश शुक्ल (प्राध्यापक समाजशास्त्र एवं समाजकार्य, टीआरएस महाविद्यालय, रीवा) ने पत्रिका के सफल प्रकाशन पर शुभकामनाएं भेजीं।

प्राध्यापकों व शोधार्थियों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में वाणिज्य विभागाध्यक्ष श्री अजय कुमार राजा, श्री दिलीप कुमार बढ़ाई, श्रीमती राजेश्वरी सोनी, श्री प्रदीप कन्हेर, श्रीमती सरस्वती सेठ, श्री आशुतोष पूरी गोस्वामी, श्री मनबोध चौहान, श्री केदारचंद बनपाल, श्रीमती मनीषा प्रधान, डॉ. गरिमा दीवान, सुश्री नम्रता तंबोली, सुश्री रेणुका साहू, प्रकाशमणि साहू सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी व स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन अतिथि व्याख्याता एवं शोधार्थी श्री विजय कुमार मिर्चे ने किया। अंत में डॉ. रीता पांडे ने आभार व्यक्त करते हुए शोध पेपर लेखन में संदर्भ ग्रंथ सूची तथा प्रकाशन संबंधी सावधानियों पर संक्षिप्त मार्गदर्शन दिया। उक्त जानकारी हिंदी विभाग के छात्र प्रशांत कुमार सोनवानी ने दी।

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