शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महासमुंद में हुआ सांस्कृतिक उल्लास का सुंदर संगम
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, महासमुंद।
शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महासमुंद के हिंदी विभाग में एम.ए. प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागतार्थ प्रवेशोत्सव का आयोजन हिंदी तृतीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा हर्षोल्लासपूर्वक किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की आराधना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती वंदना का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण एम.ए. हिंदी की छात्रा दामनी साहू ने किया, जिसने कार्यक्रम को श्रद्धा और सौंदर्य से भर दिया।
✳️ स्वागत उद्बोधन में भाव और प्रेरणा का समन्वय
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गावती भारतीय ने स्वागत उद्बोधन में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा
> “हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। इसका बहुआयामी उपयोग और संरक्षण समाज में सांस्कृतिक जागरण का सूत्र है।”
उन्होंने तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए भाषा के प्रति समर्पण को समाज सेवा से जोड़ने का आह्वान किया।
✳️ प्राचार्य का प्रेरक संदेश
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. करुणा दुबे ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि “भाषा का सम्मान ही समाज का सम्मान है।” उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को आत्मसात कर उसके संरक्षण और प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने अनुशासनयुक्त जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा दी और हिंदी विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गावती भारतीय तथा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।
✳️ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति
- इस अवसर पर मंच पर रचनात्मकता का सुंदर संगम देखने को मिला।
- दामनी साहू ने कृष्ण भजन प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।
- प्रशांत सोनवानी ने रफ़ी के मधुर गीतों से वातावरण को सुरमयी बनाया।
- रिचा चंद्राकर ने “ऑपरेशन सिंदूर” पर अपनी भावनाओं से ओतप्रोत कविता पाठ कर उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध किया।
इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा खेल, गीत, नृत्य तथा स्वर परिवर्तन जैसे विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई, जिसने पूरे समारोह को उल्लास और जीवंतता से भर दिया।
संचालन एवं आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का सरस संचालन योषिका ठाकुर एवं खेमचंद साहू ने किया, जिन्होंने अपनी सधी हुई वाणी से आयोजन को गतिशील बनाए रखा।
प्रो. डॉ. जीवनलाल चंद्राकर ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, अध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर हिंदी विभाग की प्राध्यापक डॉ. कलमरेखा, सुश्री कल्याणी साहू (अतिथि व्याख्याता, हिंदी) सहित विभाग के समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्रवेशोत्सव ने हिंदी विभाग के विद्यार्थियों में नई ऊर्जा, आत्मीयता और सृजनशीलता का संचार किया। भाषा, संस्कृति और अभिव्यक्ति के इस संगम ने महाविद्यालय परिसर को सृजन, संवेदना और समरसता की भावना से आप्लावित किया।
