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@प्रधान संपादक सतीश शर्मा

महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय महासमुंद में भाषा और संस्कृति पर आधारित अभूतपूर्व साहित्यिक आयोजन

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, महासमुंद। आज जब वैश्विककरण के दौर में स्थानीय भाषाएँ और सांस्कृतिक पहचान अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, ऐसे समय में भाषा को समाज निर्माण, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना का आधार बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शासकीय महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महासमुंद में एक प्रेरक और गरिमा युक्त कवि सम्मेलन एवं साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय रहा – “हिंदी हमारी पहचान, छत्तीसगढ़ी हमारा सम्मान”, जो भाषा के माध्यम से समाज को दिशा देने का संकल्प बन गया।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. करुणा दुबे, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गावती भारतीय, रासेयो जिला संगठक डॉ. मालती तिवारी तथा जनभागीदारी प्रबंधन समिति के संयुक्त प्रयासों से सम्पन्न इस आयोजन ने भाषा प्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर यह संदेश दिया कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ है।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती पूजन से हुआ। सरस्वती वंदना का प्रस्तुतीकरण एम.ए. हिंदी की छात्रा दामनी साहू ने किया, जबकि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक वैविध्यता को अभिव्यक्त करती राजकीय गीत का सुमधुर गायन छात्र प्रशांत सोनवानी ने किया। इसके साथ ही उपस्थित जनों में भाषा के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और जागरूकता का वातावरण निर्मित हुआ।

मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री योगेश्वर राजु सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा –
“हिंदी हमारी पहचान है, और छत्तीसगढ़ी हमारा सम्मान। भाषा ही संस्कृति का आधार है, और संस्कृति ही समाज की आत्मा। हमें अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा दोनों को जीवन में उतारकर समाज को जोड़ना होगा।”
उन्होंने हिंदी के बहुआयामी उपयोग, संवाद के विस्तार और मातृभाषा के संरक्षण को समाज में सांस्कृतिक जागरण का सूत्र बताया। उन्होंने युवाओं को भाषा प्रेम से समाज सेवा तक जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवीचंद राठी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री पवन पटेल, शाला विकास समिति के अध्यक्ष श्री रमेश साहु, सांसद प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय परिवार के अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

साहित्यिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के रसखान कहे जाने वाले प्रमुख कवि श्री मीर अली मीर ने ‘नंदा जही का रे!’ गीत से सभी को भाव-विभोर कर दिया। व्याख्याकार श्री नंदकुमार साहू ने ‘मोर घर राम जरूर आही’ भजन से भक्ति की भावना का संचार किया। ओजस्वी कवि गुलाब ठाकुर ने ‘भगवा मेरी जान’ सहित श्रृंगार की मनोहारी रचनाओं से सबका मन मोह लिया। ग़ज़लकार श्री श्लेष चंद्राकर ने हिंदी और मातृभूमि की वंदना से श्रोताओं को रोमांचित किया। युवा प्रतिभा अभिषेक वैष्णव ने सरस कविता पाठ और शेरो-शायरी से सभा में नया उत्साह भर दिया।

प्राचार्य डॉ. करुणा दुबे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भाषा का सम्मान ही समाज का सम्मान है। उन्होंने विद्यार्थियों से भाषा को आत्मसात कर उसके संरक्षण और प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही हिंदी विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गावती भारतीय और छात्रों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दुर्गावती भारतीय ने किया, जबकि मीडिया प्रभारी छात्र प्रशांत कुमार सोनवानी ने आयोजन की विस्तृत जानकारी साझा की। उपस्थित सभी अतिथियों और विद्यार्थियों ने भाषा आधारित जागरण को समाज निर्माण से जोड़ते हुए इसे एक ऐतिहासिक पहल बताया।

यह आयोजन न केवल भाषा की महत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हिंदी और छत्तीसगढ़ी जैसे समृद्ध भाषायी परंपराएँ समाज में आत्मगौरव, सांस्कृतिक समरसता और जन-जागरण का आधार बन सकती हैं। भाषा के इस महोत्सव ने आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीप जलाया है, और समाज को एक नई दिशा देने का संकल्प भी।

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