संवाददाता तुकाराम कंसारी

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। नगर के हृदय में स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर के शताब्दी पर्व का अलौकिक समापन रविवार को भक्तिभाव और धर्मानुष्ठानों के बीच सम्पन्न हुआ। अग्रवाल समाज द्वारा नगर को समर्पित इस ऐतिहासिक मंदिर के 100 वर्ष पूर्ण होने पर विगत एक माह से जारी भव्य उत्सव ने ऐसा दिव्य वातावरण रचा, जिसे नगरवासियों ने “अद्भुत, अभूतपूर्व, अकल्पनीय” की उपाधि दी।

सामाजिक एवं धार्मिक सरोकारों से जुड़े विद्वान पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने इस विराट महोत्सव को “ना भूतों, ना भविष्यति” करार देते हुए ट्रस्टी रेखराज चतुर्भुज अग्रवाल परिवार को हृदय से साधुवाद दिया। उन्होंने कहा—

“आयोजन का प्रत्येक क्षण ऐसा लगा मानो देवत्व स्वयं संचालित कर रहा हो। विघ्न विनाशक मंगलमूर्ति गणेश और हनुमंतलाल जी मानो सूत्रधार बने थे। सृष्टि का आशीष इस आयोजन पर निरंतर बरसता रहा।”

नगर ने किया स्नेह से स्वागत

3 नवम्बर से प्रारंभ हुए नगर भोज में अग्रवाल परिवार स्वयं हाथ जोड़कर आगंतुकों का अभिनंदन करता रहा। यह सेवाभाव देखकर पूरा नगर नतमस्तक हो गया। इसके पश्चात् विशाल कलश यात्रा जैसे ही नगर भ्रमण को निकली, प्रत्येक समाज पलक पांवड़े बिछाकर स्वागत में खड़ा हो गया।

आध्यात्मिक आह्लाद का संचार

विराट विष्णु यज्ञ के शुभारंभ के साथ मंत्रोच्चारण, शंख-घंटी की गूंज और पुष्पवृष्टि की अनुभूति ने वातावरण को सतयुगमय बना दिया। श्रद्धालु भावविभोर होकर दिव्य चेतना की अनुभूति में डूबते रहे।

मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी धर्मरात्रियां

  • मंदिर परिसर दुल्हन की भांति सजा, फूल बंगले की झांकी ने वृंदावन का साक्षात् भाव जागृत किया।
  • पंडित विजय शंकर मेहता का ओजस्वी प्रवचन
  • राधाकिशोरी जी की नृत्य-नाटिका में नरसिंह भक्त की निर्दोष भक्ति का मंचन
  • हेमंत बृजवासी एवं लीला बैंड की अखंड भजन संध्या

इन सबने श्रद्धालुओं को रात्रि भर बांधे रखा। नगरवासियों ने स्वीकारा — “ऐसा सौभाग्य जीवन में पहली बार मिला है।”

शास्त्री परिवार का विशेष भावनात्मक जुड़ाव

पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने भावुक होकर कहा—

“मेरे पूज्य दादाजी पंडित सूरजमल शास्त्री ने इस मंदिर की भूमि-पूजन एवं प्राण-प्रतिष्ठा कराई। ठाकुरजी की सेवा में ही उनका प्राण छूटा। अग्रवाल परिवार ने श्रद्धा से उनकी अंतिम क्रिया की।”

उन्होंने अपने पिता और ताउजी दिवंगत पंडित बनवारीलाल व युगलकिशोर शास्त्री की सेवाओं का भी स्मरण करते हुए, अग्रवाल परिवार के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।

“धर्मप्रभावना निरंतर बनी रहे”

शास्त्री जी ने प्रार्थना की—

“भगवान श्री राधाकृष्ण की कृपा से यह परिवार सदैव धर्म, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर रहे। इनके यश-कीर्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहे।”

शताब्दी महोत्सव के इस अविस्मरणीय आयोजन ने न केवल श्री राधाकृष्ण मंदिर के आध्यात्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है, बल्कि नगरवासियों के हृदय में श्रद्धा और आनंद का अमिट भाव भी अंकित कर गया है।

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