संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। राजिम, जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयागराज और धार्मिक राजधानी कहा जाता है, आज भी एक अदद बस स्टैंड के लिए तरस रहा है। डिप्टी सीएम अरुण साव द्वारा जुलाई 2024 में की गई 2 करोड़ रुपए की घोषणा को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन आज भी यात्री खुले आसमान के नीचे धूप, बारिश और ठंड झेलने को मजबूर हैं।
यह न सिर्फ जनता की उपेक्षा है, बल्कि एक जिम्मेदार सरकार की नाकामी भी है, जो घोषणा करके भूल जाती है और धरातल पर कुछ नहीं होता।
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घोषणा बड़ी, लेकिन ज़मीन पर एक ईंट तक नहीं रखी गई!
साल 2022 में तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया ने हाईटेक बस स्टैंड के लिए राशि स्वीकृत की थी। 2023 में सत्ता बदली, विधायक बदले, पर हालात जस के तस। वर्तमान विधायक रोहित साहू ने विधानसभा में आवाज उठाई, तो डिप्टी सीएम अरुण साव ने दोबारा 2 करोड़ की घोषणा कर दी। उन्होंने तो यहां तक कहा कि “अगर राशि कम पड़ी तो और देंगे।”
परंतु घोषणाओं से नहीं, ईंट-पत्थर से बस स्टैंड बनता है। और यहां सिर्फ भाषणों की नींव रखी गई है, निर्माण की नहीं।
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प्रशासनिक निष्क्रियता या राजनीतिक दिखावा?
कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल ने 4 एकड़ भूमि आरक्षित कर दी थी। पूरी उम्मीद थी कि जल्द काम शुरू होगा। नगरवासी मानकर बैठे थे कि अब कोई अड़चन नहीं। लेकिन नतीजा शून्य। राजिम की जनता साल भर से इंतज़ार कर रही है, पर न तो निविदा निकली, न कार्यादेश, और न ही स्थल पर कोई हलचल।
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धर्म नगरी की यह हालत शर्मनाक: सड़क किनारे धूप, बारिश में यात्री बेहाल
मंगलवार को गरियाबंद रोड पर सैकड़ों यात्री धूप में झुलसते, बारिश में भीगते दिखाई दिए। महिलाएं बच्चों को लेकर परेशान थीं। यात्रियों ने बताया कि “यहां न कोई छाया है, न विश्रामगृह, न शौचालय।”
क्या यही है ‘विकास’? क्या यही है ‘जनसेवा’?
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शहरों में हाईटेक बस स्टैंड और राजिम में सिर्फ वादे
जहां अन्य छोटे नगरों में हाईटेक बस स्टैंड बन चुके हैं, वहीं राजिम जैसी ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी बस स्टॉप जैसी भी सुविधा से वंचित है। यह क्षेत्र तीन मुख्यमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री, और दो निगम अध्यक्ष देने वाला रहा है। आज भी यहां हर 5 मिनट में रायपुर के लिए बसें चलती हैं, कुल 150 से अधिक यात्री वाहन रोजाना गुजरते हैं।
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अब सवाल जनता का:
1. क्यों नहीं हुआ अब तक बस स्टैंड निर्माण?
2. घोषणा को एक साल हो गया, फिर भी काम शुरू क्यों नहीं?
3. जवाबदेही किसकी है – प्रशासन की या जनप्रतिनिधियों की?
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अब जनता पूछेगी जवाब – वादों की नहीं, काम की ज़रूरत है
राजिम शहर न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों का भी मुख्य केंद्र बन चुका है। तेजी से बढ़ती आबादी और यात्री दबाव को देखते हुए एक पूर्ण सुविधायुक्त बस स्टैंड की तत्काल आवश्यकता है।
अगर शासन ने इस पर जल्द कार्यवाही नहीं की, तो यह मुद्दा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
