@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, धमतरी। छत्तीसगढ़ का धमतरी, जिसे कभी धर्म और संस्कृति की नगरी के रूप में जाना जाता था, आज एक काले सच का गढ़ बन चुका है। शहर में देह व्यापार का धंधा इस कदर फल-फूल रहा है कि यह न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पड़ोसी बदर जिले और अन्य राज्यों तक अपनी “सेवाएं” पहुंचा रहा है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता और कथित संलिप्तता ने इस समस्या को और गहरा दिया है, जिससे जनता में आक्रोश और अविश्वास बढ़ रहा है।

देह व्यापार का बढ़ता जाल: होटल, लॉज और किराए के मकानों में चल रहा खेल

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, धमतरी शहर के लगभग 90% होटल, लॉज और मैरिज गार्डन देह व्यापार के अड्डों में तब्दील हो चुके हैं। इतना ही नहीं, कुछ किराए के मकानों और निजी आवासों में भी यह गैरकानूनी धंधा जोर-शोर से चल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई ऐसे अड्डे पुलिस थानों से चंद कदमों की दूरी पर संचालित हो रहे हैं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कारोबार को पुलिस की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर चलाना असंभव है।

पुलिस की चुप्पी: मुफ्त “सेवाएं” और चढ़ावे का खेल

सूत्रों के हवाले से पता चला है कि कुछ पुलिस कर्मियों को न केवल मुफ्त सेवाएं दी जा रही हैं, बल्कि चढ़ावे के रूप में रिश्वत भी मिल रही है। यही कारण है कि इस धंधे के खिलाफ कार्रवाई का डर लगभग खत्म हो चुका है। कभी-कभार पुलिस की औपचारिक छापेमारी होती भी है, तो संलिप्त कर्मियों को संरक्षण देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। इस लचर व्यवस्था के चलते होटल, लॉज और मैरिज गार्डन में सघन जांच महीनों तक नहीं होती, जिससे संचालकों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।

ऑनलाइन नेटवर्क और व्हाट्सएप का खेल

यह काला कारोबार अब डिजिटल युग में भी अपनी जड़ें जमा चुका है। व्हाट्सएप के जरिए युवतियों की तस्वीरें भेजी जाती हैं, उनकी कीमत तय की जाती है, और एडवांस पेमेंट के बाद ग्राहकों को लोकेशन भेजा जाता है। इस नेटवर्क में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों से युवतियों को दलालों के जरिए धमतरी लाया जा रहा है। यह सब पुलिस की जानकारी में होने के बावजूद अनियंत्रित रूप से चल रहा है।

पीटा एक्ट का डर: शहर छोड़ ग्रामीण इलाकों में पनाह

पुलिस की कार्रवाई और पीटा एक्ट के डर से कई संचालक अब शहर के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में अपने अड्डे स्थानांतरित कर रहे हैं। इससे न केवल यह धंधा और गुप्त हो रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका दुष्प्रभाव फैल रहा है।

प्रशासन से सवाल: धर्म की नगरी का अपमान कब तक?

धमतरी की पहचान अब धर्म और संस्कृति की बजाय अनैतिक कृत्यों के केंद्र के रूप में होने लगी है। पुलिस प्रशासन की चुप्पी और कथित संलिप्तता ने इस समस्या को और जटिल बना दिया है। जनता में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक धर्म की नगरी इस काले धंधे का शिकार बनी रहेगी? क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा, या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

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