“पंचायत तब खुले जब सचिव का मन हो, ग्रामीणों की समस्याएं भगवान भरोसे”

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, धमतरी/कुरुद। नवपदस्थ कलेक्टर अविनाश मिश्रा द्वारा जिले में प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही के लिए सख्त आदेश जारी किए गए हैं। शनिवार को भी अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात कही गई है, ताकि जनता को अधिकतम सेवाएं मिल सकें। लेकिन ग्राम पंचायत कठौली में कलेक्टर के इन निर्देशों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। यहां के पंचायत में सचिव ही अपनी मर्जी की मालिक है — जब इच्छा हो आए, जब इच्छा हो चले जाए।

सचिव की लापरवाही से ठप पड़े जनसेवा के काम

ग्राम पंचायत कठौली में सचिव की अनियमित उपस्थिति और गैरजवाबदेही से आम ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

मनरेगा भुगतान हो, पेंशन फॉर्म भरवाना हो, प्रमाण पत्र लेना हो या शिकायत दर्ज करानी हो — कार्यालय में कोई सुनवाई ही नहीं होती। पंचायत में दिन भर ताला लटका रहता है या कभी-कभी सचिव आ जाए तो बहुत है।

ग्रामीणों ने बताया कि महीने में बमुश्किल कुछ दिन ही सचिव की उपस्थिति रहती है और जब आ भी जाए तो न तो समय पर ड्यूटी निर्वहन होता है, न ही विभागीय कार्यों में कोई गंभीरता दिखती है।

ग्रामीणों ने बताया कि पेंशन, मनरेगा, गांवों की मूलभूत सुविधाएं और जरूरी कार्य के लिए पंचायत से सहयोग की अपेक्षा रहती है।

  • जब यहां संबधित अधिकारी ही नहीं है तो वह अपनी समस्या किससे रखें?
  • क्या? प्रशासनिक कामों में भी जनप्रतिनिधि ही सील सिग्नेचर लगाएंगे
  • या, अपनी ड्यूटी के लापरवाह अधिकारी का काम वे देखेंगे? सवाल कहने को बहुत हैं…!
  • आगे देखना आवश्यक होगा कि कुछ प्रशासनिक सुधार होता है या किसी की से ही पंचायत खुलता और बंद होता है?
  • क्या ? अब जनप्रतिनिधि प्रशासनिक जिम्मेदारी भी खुद निभाएं?
  • क्या जनता का हक केवल किसी की “इच्छा” पर निर्भर रहेगा?

पहले भी हुई शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं — प्रशासन मौन क्यों?

ग्रामवासियों ने बताया कि पंचायत सचिव के खिलाफ पूर्व में भी मौखिक शिकायतें की गई थीं, लेकिन न तो कोई चेतावनी दी गई, न जांच हुई, और न ही कोई कार्रवाई।

क्या यह अधिकारियों की मनमानी को संरक्षण देने की मानसिकता है?
या फिर प्रशासनिक व्यवस्था में गहराई तक बैठी उदासीनता?

कलेक्टर के आदेश कागज़ों में सीमित?

कलेक्टर अविनाश मिश्रा के सख्त निर्देशों के बावजूद यदि पंचायत जैसे निचले स्तर पर भी कामकाज अस्त-व्यस्त है, तो यह सीधा सवाल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा करता है।

शनिवार को भी पूर्णकालिक उपस्थिति का आदेश, पंचायत कार्यालय खुला होना जरूरी — लेकिन कठौली में “कभी खुलती है, कभी नहीं” जैसी स्थिति बनी हुई है।

जनता की चेतावनी: यदि कार्रवाई नहीं हुई तो होगा विरोध

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सचिव की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ, तो उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत करेंगे।

जनता का कहना है कि योजनाओं के लाभ पाने के लिए हमें बार-बार धक्के खाने पड़ रहे हैं, यह शासन-प्रशासन के लिए शर्मनाक है।

अब जनता पूछती है —

क्या पंचायत सचिव के खिलाफ होगी ठोस कार्रवाई या फिर पंचायत किसी की “स्वेच्छा” से चलती रहेगी?

Share.

Contact US

सतीश शर्मा
Editor in Chief


Mobile: 9893664533
Email: cglokdarshan@gmail.com
Address: ब्राह्मण पारा, नारी (कुरुद), जिला – धमतरी (छ.ग) 493663

Important Pages

Disclaimer

समाचारों की श्रृंखला में ‘छत्तीसगढ़ लोकदर्शन’ सबसे विश्वसनीय वेब न्यूज पोर्टल है, इसमें देश दुनिया की नवीनतम खबरों के साथ एक वैचारिक चिंतन भी है। ज्ञातव्य हो कि संवाददाताओं द्वारा भेजे गए समाचार की पुष्टि के लिए संपादक या पोर्टल किसी भी तरह उत्तरदायी नहीं है।

© 2025 cglokdarshan.com. Designed by Nimble Technology.

Exit mobile version