संवाददाता तुकाराम कंसारी 

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन नवापारा-राजिम। श्वेताम्बर जैन समाज द्वारा पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की भक्ति-भावना से आराधना निरंतर जारी है। द्वितीय दिवस की सुबह ऋषभदेव मंदिर में प्रभु का अभिषेक, पखाल एवं पूजन बड़े हर्षोल्लास और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर इंद्र-इंद्राणी की भूमिका में ऋषभचंद, सुरेश टाटिया, संजय बंगानी, प्रिंस पारख तथा श्राविकाएँ सोनल बोधरा, सोनल टाटिया, मनीषा बंगानी, मनीषा पारख, आभा, कांति, कविता बंगानी और सरलाबाफना ने गहन श्रद्धा से अनुष्ठान किया। तत्पश्चात शांति कलश, आरती एवं वंदन का आयोजन हुआ।

ज्ञान की पंचविद्याओं पर प्रवचन

प्रवचन कार्यक्रम में स्वाध्यायी कुशल चोपड़ा ने “आत्मदर्शन का पर्व अनोखा आया है” गीत का वाचन कर पर्युषण की महिमा का गुणगान किया। इसके पश्चात स्वाध्यायी वीरेन्द्र मुथा ने ज्ञान की पाँच विद्याओं – मति, श्रुत, अवधि, मनःपर्यय और केवलज्ञान – का विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि कल्प सूत्र भगवान महावीर के जन्म, तपस्या, केवलज्ञान और मोक्षमार्ग का अद्भुत वर्णन करता है और यह हमें सिखाता है कि जीवन का परम लक्ष्य आत्मशुद्धि और मुक्ति है, न कि भोग-विलास।

श्रद्धालुओं ने लिया पुण्य लाभ

ज्ञान चढ़ावे का लाभ पूनम प्रकाशचंद, प्रदीप बोथरा, हेमराज पारख, लालचंद बंगानी एवं एक गुप्त परिवार ने प्राप्त किया। कल्प सूत्र चढ़ावे का लाभ ऋषभचंद बोथरा परिवार ने लिया। जयकारों और बैंड-बाजों की मधुर ध्वनि के बीच कल्प सूत्र (पोथा जी) का नगर भ्रमण कर परिवार के घर ले जाया गया।

शाम को बोथरा निवास पर भक्ति भावना से ओत-प्रोत विशेष कार्यक्रम हुआ। आगामी दिनों में कल्प सूत्र की विवेचना श्वेताम्बर जैन मंदिर प्रांगण में स्वाध्यायी बंधुओं द्वारा की जाएगी।

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