नारी बायपास में लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, उखड़ी सड़क पर दौड़ रहे ओवरलोड रेत हाईवा; विभागीय जवाब भी सवालों के घेरे में
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरूद। विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की सड़क स्वीकृत हो, पुरानी सीसी रोड को तोड़कर उखाड़ दिया जाए और उसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की सुध तक न ली जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। नारी बायपास मार्ग पर इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति दिखाई दे रही है। लोक निर्माण विभाग द्वारा 2.15 किलोमीटर लंबे नारी बायपास मार्ग के लिए 7 करोड़ 96 लाख 98 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। लेकिन निर्माण कार्य की जमीनी स्थिति देखकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आखिर निर्माण शुरू किए बिना सड़क क्यों तोड़ी गई?
क्या विभाग ने सड़क उखाड़ने से पहले निर्माण की तैयारी पूरी नहीं की थी? यदि तैयारियां पूरी थीं, तो काम शुरू करने में देरी क्यों हो रही है? इन सवालों का जवाब फिलहाल ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है।
सड़क उखाड़ी, लेकिन निर्माण का अता-पता नहीं
नारी बायपास मार्ग पर पहले से मौजूद सीसी रोड को तोड़ दिया गया है, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा। सड़क की मौजूदा स्थिति ग्रामीणों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उखड़ी हुई सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य तत्काल शुरू नहीं करना था, तो सड़क को इस तरह उखाड़कर क्यों छोड़ दिया गया?
सड़क निर्माण के नाम पर पुरानी सड़क को तोड़ देना ही विकास नहीं है। निर्माण की प्रक्रिया में समयबद्धता, यातायात की व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। लेकिन नारी बायपास की स्थिति इन बुनियादी अपेक्षाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
उखड़ी सड़क पर ओवरलोड रेत हाईवा, 24 घंटे धूल का गुबार
ग्रामीणों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उखड़ी हुई सड़क पर ओवरलोड रेत हाईवा लगातार दौड़ रहे हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पर बने गड्ढों की समस्या और गंभीर होने की आशंका है। वहीं, 24 घंटे वाहनों की आवाजाही के कारण आसपास के क्षेत्र में धूल का गुबार उड़ रहा है। इससे स्थानीय निवासियों को आवागमन के साथ-साथ दैनिक जीवन में भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सवाल यह भी है कि निर्माणाधीन मार्ग पर भारी वाहनों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है? यदि सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत है, तो निर्माण की गुणवत्ता और सड़क की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओवरलोड वाहनों के परिचालन पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
खेती-किसानी के समय ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं
खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में सड़क को उखाड़कर छोड़ देना ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रहा है। किसानों और कृषि कार्य में लगे वाहनों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में सड़क निर्माण में अनावश्यक देरी का खामियाजा आखिर ग्रामीण और किसान ही क्यों भुगतें?
यदि निर्माण कार्य की शुरुआत से पहले यातायात प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया गया होता, तो लोगों को इस तरह की परेशानियों से बचाया जा सकता था। अब सवाल यह है कि विभाग कब तक इस स्थिति को नजरअंदाज करता रहेगा?
ठेकेदार जितेंद्र चंद्राकर के पास भी स्पष्ट जवाब नहीं
निर्माण कार्य शुरू नहीं होने के संबंध में जब ठेकेदार जितेंद्र चंद्राकर से जानकारी ली गई, तो वे कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बता सके। उन्होंने केवल इतना कहा कि काम शुरू होगा। लेकिन सवाल यह है कि काम कब शुरू होगा? निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या है? देरी की वजह क्या है? इन महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
करोड़ों रुपये की लागत वाली परियोजना में केवल इतना कह देना कि काम शुरू होगा, पर्याप्त नहीं है। जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि काम शुरू होने की निश्चित तारीख और निर्माण की समयसीमा जानने का अधिकार है। गौरतलब हो कि गोजी नारी बाईपास रोड भी इन्ही ठेकेदार द्वारा बनवाया जा रहा है दोनो जगहों पर निर्माण संबंधी कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है। पहले भी सुस्त और लेटलतीफी काम के बाद अब इस बाईपास रोड में सुस्त रवैए से क्षेत्रवासियों में नाराजगी देखी जा रही है।
एसडीओ आरके शुक्ला का जवाब भी सवालों के घेरे में
इस मामले में लोक निर्माण विभाग के एसडीओ आरके शुक्ला से भी निर्माण कार्य में देरी का कारण पूछा गया। उनके अनुसार, पटवारियों की हड़ताल के कारण वहां काम शुरू नहीं हो सका है तथा स्थल निरीक्षण आदि की प्रक्रिया भी शेष है।
यह जवाब अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। यदि स्थल निरीक्षण ही शेष था, तो सीसी रोड को तोड़ने की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक निरीक्षण और विभागीय प्रक्रियाएं पूरी नहीं की जानी चाहिए थीं? पटवारियों की हड़ताल से ऐसी कौन-सी प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिसके कारण सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका?
इन सवालों पर विभाग को स्पष्ट और तथ्यपरक जवाब देना चाहिए। आखिरकार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी तय करना विभाग का काम है, जबकि उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
प्रभावशाली क्षेत्र में काम करने का दावा, लेकिन जमीन पर विकास की रफ्तार कहां?
एसडीओ आर.के. शुक्ला द्वारा स्वयं को पूर्व मुख्यमंत्री के क्षेत्र में और उनके प्रभाव में काम करने वाले अधिकारी के रूप में प्रचारित किए जाने की बात भी चर्चा में है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर प्रभाव और सक्रियता का दावा किया जाता है, तो नारी बायपास जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर काम की यह स्थिति क्यों बनी हुई है?
किसी जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली क्षेत्र से जुड़ाव का उल्लेख अपने आप में कार्य की गुणवत्ता या गति का प्रमाण नहीं हो सकता। असली कसौटी यह है कि आम जनता को सुविधा मिल रही है या नहीं। नारी बायपास के मामले में फिलहाल ग्रामीणों के सामने धूल, गड्ढे, भारी वाहनों की आवाजाही और निर्माण शुरू होने की अनिश्चितता जैसी समस्याएं हैं।
खनिज परिवहन और सड़क निर्माण की निगरानी पर भी उठे सवाल
एक तरफ करोड़ों रुपये की लागत से सड़क निर्माण की योजना है, तो दूसरी तरफ उसी उखड़ी सड़क पर ओवरलोड रेत हाईवा की लगातार आवाजाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में लोक निर्माण विभाग और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या खनिज विभाग ओवरलोड वाहनों के परिचालन पर प्रभावी कार्रवाई कर रहा है? क्या लोक निर्माण विभाग ने निर्माणाधीन मार्ग की स्थिति और भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर कोई ठोस कदम उठाया है? दोनों विभागों के बीच समन्वय की वास्तविक स्थिति क्या है?
ग्रामीणों की परेशानी के बीच दोनों विभागों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। हालांकि, विभागों के बीच मिलीभगत के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इसकी स्वतंत्र जांच और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल आवश्यक है। लेकिन मौजूदा हालात दोनों विभागों की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करते हैं।
जनता के सवालों का जवाब देगा कौन?
नारी बायपास मार्ग की मौजूदा स्थिति ने विकास कार्यों की योजना, तैयारी और क्रियान्वयन को लेकर कई बुनियादी प्रश्न खड़े कर दिए हैं। 7 करोड़ 96 लाख 98 हजार रुपये की स्वीकृत राशि वाली सड़क का निर्माण आखिर कब शुरू होगा? उखड़ी हुई सीसी रोड की वजह से बन रहे गड्ढों की मरम्मत और धूल से राहत के लिए क्या तत्काल कदम उठाए जाएंगे? ओवरलोड रेत हाईवा पर नियंत्रण की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? और निर्माण कार्य में देरी के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी?
लोक निर्माण विभाग को निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति, देरी के कारण और निर्धारित समयसीमा सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही, खनिज विभाग को ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
करोड़ों रुपये की परियोजना में सड़क पहले उखाड़ देना और फिर निर्माण की शुरुआत के लिए स्पष्ट समयसीमा तक नहीं बता पाना किसी भी स्थिति में संतोषजनक कार्यप्रणाली नहीं कही जा सकती। विकास का लाभ जनता को मिलना चाहिए, न कि स्वीकृत सड़क की बदहाली का बोझ जनता के सिर पर डाल दिया जाए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग सवालों का जवाब देते हैं या नारी बायपास के ग्रामीणों को इसी धूल, गड्ढों और अव्यवस्था के बीच इंतजार करना पड़ेगा।








