संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम।छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेसी को ईमेल के माध्यम से मांग की है कि प्राचार्य पदोन्नति हेतु पात्र रहे सेवानिवृत्त प्रधानपाठकों तथा व्याख्याताओं को कार्य नहीं वेतन नहीं के सिद्धांत के आधार पर काल्पनिक पदोन्नति आदेश जारी किया जाए।
फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष श्री राजेश चटर्जी, संभाग अध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर, जिला अध्यक्ष श्री मिश्री लाल तारक, विकासखंड अध्यक्ष श्री यशवंत कुमार साहू, जिला कोषाध्यक्ष श्री सोहन सेन सहित अनेक पदाधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ राजपत्र 5 मार्च 2019 के तहत शिक्षा एवं आदिवासी विभाग के शिक्षक संवर्गों के लिए समेकित भर्ती एवं पदोन्नति नियम लागू किया गया था। मार्च–अप्रैल 2025 में प्राचार्य पद पर पदोन्नति हेतु विभागीय पदोन्नति समिति (डी.पी.सी.) की बैठक हुई थी, जिसके आधार पर टी-संवर्ग में 1335 तथा ई-संवर्ग में 1478 प्राचार्य पदोन्नति आदेश 30 अप्रैल 2025 को जारी किए गए।
किन्तु 29 अगस्त 2025 को जारी पदस्थापना आदेश में 30 अप्रैल 2025 से 31 जुलाई 2025 के बीच सेवानिवृत्त हुए टी-संवर्ग के व्याख्याताओं एवं प्रधानपाठकों के नाम शामिल नहीं किए गए। जबकि मंत्रालय द्वारा पूर्व में 6 अक्टूबर 2018 को 171 व्याख्याताओं/प्रधानपाठकों को कार्य नहीं वेतन नहीं के आधार पर नोशनल पदोन्नति का लाभ प्रदान किया गया था, जिससे संबंधितों को पेंशन और ग्रेच्युटी में आर्थिक लाभ मिला था।
फेडरेशन ने शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव से आग्रह किया है कि सेवानिवृत्ति के कारण प्राचार्य पदोन्नति से वंचित पात्र व्याख्याता एवं प्रधानपाठकों को भी इसी सिद्धांत पर काल्पनिक पदोन्नति देकर सम्मान प्रदान किया जाए, ताकि उन्हें उनके सेवा जीवन का उचित मान-सम्मान मिल सके।
फेडरेशन ने स्पष्ट कहा है कि यह माँग न केवल न्यायसंगत है बल्कि सेवा निवृत्ति के पश्चात शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।








