@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, धमतरी/ कुरुद। विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला ग्राम पंचायत नारी, विकासखंड कुरूद, जिला धमतरी से सामने आया है। आरोप है कि पक्की नाली निर्माण का कार्य बिना कराए ही उसे पूर्ण दिखाकर दो लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली गई, जबकि मौके पर आज तक निर्माण शुरू तक नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता सतीश शर्मा ने इस पूरे मामले की शिकायत पंचायती राज मंत्रालय सहित संबंधित अधिकारियों से की है। शिकायत में कहा गया है कि “पक्की नाली निर्माण – सतीश शर्मा के घर से सरस्वती शर्मा के घर तक (कार्य क्रमांक 57074239)” नाम से स्वीकृत कार्य को कागजों में पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया, लेकिन जमीन पर नाली का नामोनिशान तक नहीं है।
भुगतान का पूरा विवरण, फिर भी काम गायब
शिकायत के आधार पर तीन भुगतानों का उल्लेख किया गया है—
- ₹1,00,000 – वाउचर XVFC/2023-24/P/10, दिनांक 23 अगस्त 2023
- ₹50,000 – वाउचर XVFC/2023-24/P/17, दिनांक 18 अक्टूबर 2023
- ₹50,000 – वाउचर XVFC/2023-24/P/11, दिनांक 18 अक्टूबर 2023
- ये भुगतान Shree Ram Traders and Paint House के नाम से दर्ज बताए गए हैं। दस्तावेज़ों में सचिव विशाल राम नगारची तथा पूर्वसरपंच जगत पाल साहू के हस्ताक्षर होने का भी उल्लेख है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब काम हुआ ही नहीं, तो माप-पुस्तिका, पूर्णता प्रमाणपत्र और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी कर दी गई?
जांच के नाम पर लीपापोती के आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 15 अक्टूबर 2025 को दर्ज शिकायत के बाद जांच का आदेश ऑनलाइन जारी हुआ, लेकिन स्थानापन्न सचिव युवराज साहू द्वारा शिकायतकर्ता को बिना सूचना दिए ही कागजों में पूर्णता की कार्रवाई तैयार कर दी गई।
यह मामला कलेक्टर जनदर्शन में भी लंबित बताया जा रहा है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है?
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनपद स्तर के कुछ अधिकारी अवैध वसूली कर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव होगी।
यह पहला मामला नहीं
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बस स्टैंड नारी में शौचालय-बाथरूम निर्माण के नाम पर भी राशि आहरण कर ली गई, जबकि मौके पर शौचालय मौजूद नहीं है। आरोप है कि किसी अन्य स्थान का फोटो लगाकर निर्माण दिखा दिया गया।
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल एक कार्य का नहीं, बल्कि विभिन्न योजनाओं में व्यवस्थित तरीके से हो रहे भ्रष्टाचार का संकेत माना जा रहा है।
उठते बड़े सवाल
- बिना काम के भुगतान कैसे जारी हुआ?
- माप-पुस्तिका और पूर्णता प्रमाणपत्र किस आधार पर बने?
- जांच आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों लंबित है?
- क्या उच्च स्तर पर संरक्षण के कारण मामले दबाए जा रहे हैं?
ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
- ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने मांग की है कि—
- कार्य का स्वतंत्र स्थल सत्यापन कराया जाए
- दोषी पाए जाने पर सरपंच-सचिव सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो
- फर्जी भुगतान की राशि की वसूली की जाए
- और वास्तविक निर्माण कार्य कराया जाए
- प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों या अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन फिलहाल कागजों में विकास और जमीन पर सच्चाई के बीच का अंतर एक बार फिर ग्रामीण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

