संवाददाता तुकाराम कंसारी 

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’ कहलाने वाला राजिम कुंभ कल्प मेला इस वर्ष भारी-भरकम बजट और भव्य तैयारियों के साथ आयोजित किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। त्रिवेणी संगम के पुराने महोत्सव स्थल के पास बनाई गई अस्थायी दुकानें लगभग खाली पड़ी हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, मेले के अन्य हिस्सों में व्यापारी 15 दिनों के लिए हजारों रुपए किराया देकर दुकानें लेकर कारोबार कर रहे हैं, लेकिन इस प्रमुख स्थान पर दुकानों का सूना पड़े रहना योजना और प्रबंधन पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि नवीन मेला मैदान में बनाई गई अस्थायी दुकानें पहले ही आवंटित हो चुकी थीं, लेकिन वहां भी व्यापार उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पा रहा है। दुकानों की स्थिति देखकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या दुकानों का निर्माण वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखकर किया गया था, या फिर योजना में कहीं न कहीं चूक रह गई।

मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही तो दिखाई दे रही है, लेकिन खरीदारी और बाजार की रौनक अपेक्षा से कम है। करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए मीना बाजार और अस्थायी दुकानों का खाली रहना आयोजकों की तैयारियों और रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है।

व्यापारियों का आरोप है कि इस बार मेले की लोकेशन, प्रचार-प्रसार और व्यवस्थाओं की कमी के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो मेले की उपयोगिता और उद्देश्य पर ही प्रश्न उठने लगेंगे।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि भविष्य में मेले की योजना बनाते समय व्यापारियों की वास्तविक जरूरत, श्रद्धालुओं की सुविधा और स्थान चयन पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि आयोजन केवल खर्च तक सीमित न रहकर वास्तव में जनहितकारी और सफल साबित हो सके।

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