@विशेष समाचार, संपादक सतीश शर्मा, छत्तीसगढ़ लोकदर्शन
लाखों की लागत से बने मिनी स्टेडियम को तोड़कर व्यावसायिक परिसर बनाने की तैयारी का आरोप, खिलाड़ियों में आक्रोश; सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं का अभ्यास मैदान भी बदहाल
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरूद। जिस गांव के युवा खेल और देशसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रहे हैं, वहां खेल सुविधाओं को लेकर व्यवस्था की उदासीनता अब युवाओं के आक्रोश का कारण बनती जा रही है। ग्राम नारी में लाखों रुपये की लागत से निर्मित मिनी स्टेडियम को तोड़कर वहां व्यावसायिक परिसर बनाए जाने की तैयारी की बात सामने आने से खिलाड़ियों और युवाओं में भारी नाराजगी है। युवाओं का कहना है कि जब गांव में पहले से खेल मैदान और सुविधाओं की कमी है, तब बने-बनाए स्टेडियम को खत्म करने का निर्णय युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
युवाओं के अनुसार मिनी स्टेडियम अभी पूरी तरह उपयोगी और ठीक स्थिति में है। ऐसे में इसे तोड़ने के बजाय इसका बेहतर रखरखाव और विकास किया जाना चाहिए। युवाओं ने इस संबंध में पंचायत के समक्ष अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन उनका आरोप है कि पंचायत स्तर पर उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि “जहां जाना है, वहां जाओ, हम आवेदन नहीं ले सकते।” इस रवैये ने युवाओं की नाराजगी और बढ़ा दी है।
एक तरफ स्टेडियम तोड़ने की तैयारी, दूसरी तरफ अभ्यास मैदान में रोज गड्ढे
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गांव के युवाओं के पास पहले से ही पर्याप्त खेल और प्रशिक्षण सुविधाएं नहीं हैं, तो उपलब्ध मैदानों को सुरक्षित और विकसित करने के बजाय उन्हें खत्म अथवा बदहाल क्यों होने दिया जा रहा है?
ग्राम नारी के युवा सेना, अग्निवीर, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी के लिए नए गौठान के मैदान में प्रतिदिन अभ्यास करते हैं। स्कूल की छुट्टी के बाद करीब 25–30 युवा नियमित प्रशिक्षण के लिए पहुंचते हैं, जबकि देशसेवा का सपना संजोए बड़ी संख्या में अन्य युवा भी यहां अभ्यास करते हैं।
लेकिन युवाओं के अनुसार मनाही के बावजूद रेत से भरी गाड़ियों की आवाजाही के कारण मैदान में जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। उबड़-खाबड़ मैदान में दौड़ और शारीरिक अभ्यास करना युवाओं के लिए जोखिम भरा हो गया है। पंचायत और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने का युवाओं ने आरोप लगाया है।
अभ्यास से ज्यादा मैदान बनाने में खर्च हो रहा समय
युवाओं की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उन्हें अपने लक्ष्य की तैयारी करने के बजाय बार-बार मैदान को तैयार करना पड़ रहा है। युवाओं ने अपने निजी खर्च से कई ट्रैक्टर रेत डलवाकर मैदान के हिस्सों को समतल किया और श्रमदान कर गड्ढे भरे। मैदान को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने स्वयं के पैसे से पोल और तार-घेरा भी लगाया।
युवाओं का आरोप है कि लगाए गए पोल और तार-घेरे को कुछ तत्व उखाड़कर ले जाते हैं तथा तार की चोरी भी होती है। इसके बावजूद युवा हिम्मत नहीं हार रहे और अपने खर्च से दोबारा मैदान को सुरक्षित बनाने में जुटे हैं।
सीनियर युवाओं ने संभाली ट्रेनिंग की जिम्मेदारी
संसाधनों के अभाव में भी ग्राम नारी के युवाओं ने अपने स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था खड़ी की है। सेना की पूर्व तैयारी कर चुके सीनियर युवाओं ने अपने निजी निधि से प्रोजेक्टर और प्रशिक्षण सामग्री खरीदी है। अग्निवीर और जीडी सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की ऑनलाइन एवं रिकॉर्डेड कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं।
यानी एक ओर युवा अपने पैसे से मैदान बना रहे हैं, दूसरी ओर अपने संसाधनों से प्रशिक्षण सामग्री जुटाकर अगली पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार व्यवस्था से जिस सहयोग की उम्मीद है, वह नहीं मिलने से युवाओं में निराशा है।
युवाओं का सीधा सवाल—खेल मैदान बचेंगे नहीं तो प्रतिभाएं निकलेंगी कहां से?
ग्राम नारी के युवाओं का कहना है कि मिनी स्टेडियम को तोड़ने के बजाय उसे विकसित किया जाए, अभ्यास मैदान को सुरक्षित किया जाए, भारी वाहनों की आवाजाही रोकी जाए और युवाओं को मूलभूत खेल एवं प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कुलदीप साहू, अमित कुमार सोनकर जैसे युवा विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना में चयनित होकर गांव का गौरव बढ़ा चुके हैं। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि ग्राम नारी में प्रतिभा और जुनून की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही दिशा, सुरक्षित मैदान और प्रशासनिक सहयोग की है।
अब प्रशासन से जवाब की उम्मीद
युवाओं का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने अधिकार के खेल मैदान और सुरक्षित अभ्यास स्थल की मांग कर रहे हैं। जो युवा रोज देश की सेवा में जाने के लिए पसीना बहा रहे हैं, उन्हें अपने ही गांव में मैदान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़े—यह स्थिति निश्चित रूप से गंभीर सवाल खड़े करती है।
एक तरफ लाखों की लागत से बने स्टेडियम को तोड़कर व्यावसायिक परिसर की चर्चा, दूसरी तरफ सेना भर्ती के अभ्यास मैदान में गड्ढे और चोरी होता तार-घेरा—ग्राम नारी के युवाओं की आवाज अब प्रशासन तक पहुंचना जरूरी है।
युवाओं का संदेश साफ है—“हमें मैदान दीजिए, हम देश को जवान देंगे।”








