ऑपरेशन सिंदूर OPERATION SINDOOR के बाद से लगातार यह सवाल उठ रहा है कि भारत क्‍या दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है् ? यह सवाल उठने का सबसे बडा कारण यह है कि भारत के पक्ष मे दुनिया के 11 देेशों के बयान तो आए लेकिन लडाई में मदद के लिए कहीं से पेशकश नहीं आई। उधर बुरी तरह से आर्थ्रिक तंगी झेल रहे पाकिस्‍तान के लिए तुर्की ने भारत से संंबंधों को ताक पर रखकर युदधपोत भेजा तो वहीं चीन ने न केवल खुलकर पाकिस्‍तान के पक्ष में बयान दिया बल्कि सैन्‍य व तकनीकी सहायता भी उपलब्‍घ कराई। लोग बरबस ही 1971 की लडाई में युएसएसआर USSR की मदद औैर अमरीकी धमकी के बावजूद इंदिरा गांधी के हमले तेज कर पाकि‍स्‍तान के टुकडेे कर बांग्‍लादेेश के उदय की घटना को याद कर मोदी के कदमों की इंदिरा गांधी से तुलना करने लगे हैं।

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इन तमाम सवालों के साथ फ्रेंड ट्रंप की श्रेय लेने की रणनीति, औैर मोदी का लहू में सिंदूर बहने जैसा फिॅल्‍मी और सतही बयान देना उनके समर्थकों को भले अच्‍छा लगा होगा लेकिन तटस्‍थ प्रेक्षकों ने इसे मोदी जैसेे मैच्‍योेर नेता के कद  के हिसाब से बेहद कमजोेर स्‍टैेंड माना हैै।

 

दोस्‍त दोेस्‍त ना रहा ।

मोदी काे सबसे बडा झटका अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप नेे दिया। प्रधानमंत्री मोदी जिस ट्रंप के चुनाव प्रचार सेे लेकर कुछ महीने पहले तक फ्रेड होने का प्रचार करते नहीं थकते थे। भारत से हर मामले में बहुत पिछडे हुए पाकिस्‍तान को उसी ट्रंप ने भारत की बराबरी का महत्‍व देकर बयान जारी किया।  सीज फायर का पूूरा श्रेय खुद लेने के एक नहीं अनेक बार प्रयास किए। ट्रंप की इस घृष्‍टता पर अव्‍वल तो सीज फायर के दिन ही मोदी को अडिग रहकर इस बात का खुलकर खंडन करना चाहिए था लेकिन उनके मुह से एक बोल भी नहीं फूटे। बाद में विदेश सचिव विक्रम मिस्‍त्री के खंडन के बाद भी ट्रंप बाज नहीं आए औैर दु‍निया को यह बताने से नहीं चूके कि दोनों देशोें को  व्‍यापार बंद करने की धमकी दी तब जाकर वे सीज फायर के लिए तैयार हुुए। 

 

ध्‍वस्‍त हो गया विश्‍वगुुरू का प्रोपेगेंडा 

पिछले 10 सालों में दुनिया भर के देशों में दौैरा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देेश के सामने यही तस्‍वीर पेश करते रहे कि पूरी दुनिया अब भारत की बात सुनने लगी है। दुुनिया तमाम देश भारत की प्राचीन विरासत औैर वर्तमान विदेश नीति का सम्‍मान करते हैं, सभी की नजर में अब भारत विश्‍वगुरू का दर्जा फिर से हासिल कर चुका हैै। आपरेेशन सिंदूर के बाद यह सवाल उठना स्‍वाभाविक हैै ये कैसा विश्‍व गुरू है जिसके साथ कठिन हालात मेंं नेेपाल-भूटान जैसेे पूरी तरह से निर्भर देश भी खडे हाेना तो दूर पक्ष में एक बयान तक जारी नहीं कर सके।

 

ऑपरेशन सिंदूर कितना सफल 

 ऑपरेशन सिंदूर एक सैन्य कार्रवाई थी, जो भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू की थी। इस अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया और 70 से अधिक पाकिस्तानी ड्रोनों को मार गिराया। यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ भारत की “शून्य-सहनशीलता नीति का हिस्सा था। तटस्‍थ प्रेक्षकों की मानेे तो यह अभियान अपना लक्ष्‍य हासिल करने में पूरी तरह सफल रहा। हालांकि कुछ खबरों में यह दावा किया गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परमाणु युद्ध का खतरा था, जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उल्लेख किया। हालांकि, इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया माना जा रहा है। यह ऑपरेशन पूर्ण-स्तरीय युद्ध तक नहीं बढ़ा, और भारत ने इसे आतंकवाद के खिलाफ एक लक्षित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया।

 

ऑपरेशन सिंदूर और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा भी सहीं कदम 

  ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें भारत ने पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया और 100+ आतंकियों को मार गिराया, के बाद पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ प्रचार शुरू किया। पाकिस्तान ने भी अपनी कूटनीतिक टीमें भेजने की योजना बनाई, जिसके जवाब में भारत को सक्रिय कूटनीति अपनानी पड़ी।  भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ अपनी “शून्य-सहनशीलता” नीति का हिस्सा बताया। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य था कि वैश्विक समुदाय को पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025, जिसमें 26 लोग मारे गए) और पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के 40 साल के इतिहास के बारे में बताया जाए। प्रतिनिधिमंडल देश-विशिष्ट डोजियर लेकर गए, जिसमें पाकिस्तान की आतंकवाद में संलिप्तता के सबूत थे। 

 

  वैश्विक समर्थन जुटाने में मिली कामयाबी

  ऑपरेशन सिंदूर के बाद कुछ देशों (जैसे यूएसए, यूके, फ्रांस, इज़राइल, यूएई) ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन तुर्की और चीन जैसे देश पाकिस्तान के साथ खड़े हुए। भारत को यह सुनिश्चित करना था कि अधिक से अधिक देश उसकी कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ उचित मानें, न कि क्षेत्रीय आक्रामकता के रूप में। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के स्थायी और अस्थायी सदस्यों, साथ ही OIC देशों को लक्षित करना इस रणनीति का हिस्सा था औैर भारत इसमें सफल हुआ।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने माना कि आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से लागू किया।पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेल रणनीति का जवाब भी दिया गया। उल्‍लेखनीय है कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद परमाणु युद्ध की धमकी दी, जिसे पीएम मोदी ने “न्यूक्लियर ब्लैकमेल” करार दिया। भारत को यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक समुदाय इस धमकी को गंभीरता से न ले और भारत की कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कदम माने। 

 यूएई के साथ सहयोग:

 ऑपरेशन सिंदूर के बाद शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने यूएई के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें भारत-यूएई की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। यह दर्शाता है कि भारत कुछ प्रमुख देशों के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए हुए है।  कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाब दिया, लेकिन वैश्विक मंच पर पाकिस्तान पर दबाव बनाने की आवश्यकता है। यह दर्शाता है कि भारत सक्रिय रूप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संवाद कर रहा है। 

चीन ने कोशिश की अलग-थलग करने की 

 कुछ विश्लेषणों में यह चिंता व्यक्त की गई है कि चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल ही में हुई त्रिपक्षीय बैठक (21 मई 2025) में CPEC को अफगानिस्तान तक विस्तार देने की सहमति बनी, जो भारत को दक्षिण एशिया में अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, यह केवल एक भूराजनीतिक रणनीति का संकेत है और इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पूरी तरह अलग-थलग हो गया है। भारत ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है, जैसे हासीमारा में राफेल स्क्वाड्रन और त्रिशक्ति कोर की तैनाती।

 

 

भारतीय सेना का दावा-

  यह अभियान अस्थायी रूप से रुका है, और भविष्य में और सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जो भारत की आत्मविश्वास भरी रणनीति को दर्शाता है । 

 

 भारत के समर्थन में 11 देश: 

11 देशों का समर्थन भारत को,  3 का पाकिस्‍तान को : (यूएसए, यूके, फ्रांस, इज़राइल, रूस, पनामा, नीदरलैंड्स, जापान, यूएई, यूरोपीय संघ, सऊदी अरब) ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार या ऑपरेशन सिंदूर का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया। 

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की बात कही, लेकिन अमेरिकी सांसद श्री थानेदार ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। 
  2. यूनाइटेड किंगडम (UK): पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और यूके की छाया विदेश सचिव प्रीति पटेल ने भारत के आतंकवादी ढांचे पर हमले को उचित ठहराया, यह कहते हुए कि कोई भी देश अपनी सीमा से आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यूके के विदेश सचिव डेविड लैमी ने दोनों देशों से संयम बरतने कीअपील की, लेकिन भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता दी। 
  1. फ्रांस: फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने भारत के आतंकवाद से खुद को बचाने की इच्छा के प्रति समझदारी व्यक्त की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई। 
  1. इज़राइल: इज़राइल के राजदूत रियूवेन अज़ार ने एक्स पर पोस्ट किया कि इज़राइल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है और आतंकवादियों को उनके अपराधों से बचने का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। 
  1. रूस: रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने आतंकवाद की निंदा की और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, जो भारत की कार्रवाई के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन के रूप में देखा जा सकता है। 
  1. पनामा: पनामा के विदेश मंत्रालय ने पहलगाम हमले में भारत के नुकसान के प्रति एकजुटता व्यक्त की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष का समर्थन किया। 
  1. नीदरलैंड्स: डच सांसद गीअर्ट विल्डर्स ने एक्स पर पोस्ट किया कि कश्मीर 100% भारतीय है और #PakistanBehindPahalgam हैशटैग का उपयोग किया, जो भारत के पक्ष में स्पष्ट समर्थन दर्शाता है। 
  2. जापान: जापानी विदेश मंत्री इवाया ताकेशी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया, जो भारत की कार्रवाई के लिए परोक्ष समर्थन के रूप में देखा जा सकता है। 
  3. संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यूएई ने भारत-पाकिस्तान वार्ता को समर्थन दिया और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के साथ राजनयिक संबंधों को मजबूत किया, जैसा कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की यूएई यात्रा से स्पष्ट है 
  4. यूरोपीय संघ (EU): कुछ एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया कि यूरोपीय संघ ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, हालांकि यह अप्रत्यक्ष रूप से संयम की सलाह के साथ था।
  5. सऊदी अरब: सऊदी अरब के विदेश राज्य मंत्री ने इस्लामाबाद का दौरा किया और तनाव कम करने की कोशिश की, लेकिन कुछ स्रोतों में इसे भारत के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन के रूप में देखा गया, क्योंकि सऊदी अरब ने भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखी। 

पाकिस्तान के समर्थन में 3 देश:

पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत की कार्रवाइयों ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया, और कुछ देशों ने इस दृष्टिकोण का समर्थन किया। निम्नलिखित देशों ने पाकिस्तान के पक्ष में बयान दिए:

  1. तुर्की: तुर्की ने भारत की कार्रवाई को “पाकिस्तान की संप्रभुता का अनुचित उल्लंघन” करार दिया और स्पष्ट रूप से पाकिस्तान का समर्थन किया।[] 
  2. चीन: चीन ने पाकिस्तान के साथ अपनी त्रिपक्षीय बैठक (21 मई 2025) में CPEC को अफगानिस्तान तक विस्तार देने की सहमति दी, जो भारत के खिलाफ भूराजनीतिक रणनीति के रूप में देखा गया। कुछ एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया कि चीन स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा है।
  3. अज़रबैजान: एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया कि अज़रबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
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