खुमानलाल साव और मिथिलेश साहू की स्मृति में सजेगी सांस्कृतिक महफिल
12 नवंबर को बाजार चौक में होगा भव्य आयोजन, स्वर्ण पदक से सम्मानित रिखी क्षत्रिय की टीम बांधेगी लोककला का समां
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरूद। छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकजीवन की जीवंत परंपराएं और पारंपरिक कला-संस्कृति का अनूठा संगम आगामी 12 नवंबर को कठौली में देखने को मिलेगा। दीपावली पर्व की सांस्कृतिक श्रृंखला के अंतर्गत मातर एवं भाई दूज के अवसर पर अनुराग साहित्य एवं कला संस्था द्वारा बाजार चौक कठौली में भव्य लोकसांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। रात 9 बजे से शुरू होने वाली इस सांस्कृतिक महफिल में छत्तीसगढ़ की लोककला और लोकसंगीत की स्वर लहरियां देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वर्ण पदक से सम्मानित वरिष्ठ लोककला साधक श्री रिखी क्षत्रिय के निर्देशन में मड़ौदा-भिलाई की प्रसिद्ध लोक रागिनी सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी। अपनी विशिष्ट लोकशैली और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के लिए पहचान रखने वाली यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।
कला पुरोधाओं की स्मृति को समर्पित आयोजन
इस आयोजन की विशेषता यह है कि यह केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोककला के दो प्रतिष्ठित साधकों एवं कला पुरोधाओं स्वर्गीय खुमानलाल साव और स्वर्गीय मिथिलेश साहू की स्मृतियों को समर्पित सांस्कृतिक अभियान भी है। अनुराग साहित्य एवं कला संस्था द्वारा प्रतिवर्ष उनके सम्मान और योगदान को स्मरण करते हुए यह आयोजन किया जाता है।
संस्था का उद्देश्य लोककला की विरासत को सहेजना, पारंपरिक कला विधाओं को नई पहचान दिलाना और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में लोकपरंपराओं की प्रासंगिकता बनाए रखने की दिशा में इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रशांत सोनवानी ने क्षेत्र के ग्रामवासियों, कला प्रेमियों एवं आसपास के गांवों के लोगों से कार्यक्रम में अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। कठौली में होने वाली यह सांस्कृतिक संध्या लोककला के साधकों को नमन करने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का एक यादगार अवसर बनेगी।








