रक्षाबंधन पर मासूम की मौत से गांव दहला
तेज रफ्तार रेत से भरे ट्रैक्टर ने 4 वर्षीय बच्चे को रौंदा, अवैध रेत निकासी पर ग्रामीण नेतृत्व और माइनिंग अमले की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरूद/नारी। रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व के दिन ग्राम नारी के कोकड़ी मोड़ के पास एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया। रेत से भरे ट्रैक्टर की चपेट में आने से चार वर्षीय मासूम की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जिस घर में रक्षाबंधन की खुशियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा है। मासूम परिवार के इस असहनीय दुख के प्रति पूरा गांव और संवेदनशील समाज गहरी संवेदना व्यक्त कर रहा है।
हादसे के बाद ग्रामीणों का आक्रोश केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव की सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे रेत से भरे ट्रैक्टरों और कथित अवैध रेत निकासी को लेकर वर्षों से उठ रहे सवाल फिर सामने आ गए हैं।
मासूम की मौत के पीछे सिर्फ चालक नहीं, व्यवस्था पर भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव और आसपास के क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन नहीं चल रहा होता, तो इस तरह रेत से लदे ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही का सवाल ही नहीं उठता। ग्रामीण नेतृत्व आखिर किसके दबाव में आंखें मूंदे बैठा है? खनिज विभाग और संबंधित अधिकारी क्षेत्र में कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
एक मासूम की जान चली गई—अब जवाबदेही तय होना जरूरी है।
अवैध उत्खनन केवल शासन को राजस्व की क्षति नहीं पहुंचाता, बल्कि गांव की सड़कों, पर्यावरण और आम नागरिकों की सुरक्षा को भी सीधे खतरे में डालता है। रेत से भरे भारी वाहन यदि आबादी के बीच तेज गति से दौड़ते हैं तो किसी भी समय ऐसी त्रासदी दोहराई जा सकती है।
ग्रामीणों का गुस्सा व्यवस्था के प्रति भी
हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा इतना भड़का कि स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भीड़ द्वारा चालक के साथ मारपीट और ट्रैक्टर को आग के हवाले किए जाने की घटना भी सामने आई। पुलिस ने घायल चालक को अस्पताल पहुंचाया तथा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल तैनात किया।
हालांकि कानून हाथ में लेना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है, लेकिन इस घटना के पीछे उमड़ा जनाक्रोश उस गहरे आक्रोश का संकेत है, जो ग्रामीणों के भीतर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर लंबे समय से पनप रहा है।
माइनिंग विभाग अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर कार्रवाई करे
अब सबसे बड़ा सवाल खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन से है—क्या मासूम की मौत के बाद भी अवैध रेत निकासी पर केवल खानापूर्ति होगी या जिम्मेदारों पर वास्तविक कार्रवाई होगी?
प्रशासन को चाहिए कि क्षेत्र में संचालित रेत घाटों, ट्रैक्टरों के परिवहन, वैध-अवैध रॉयल्टी, उत्खनन की मात्रा और परिवहन मार्ग की निष्पक्ष जांच कराए। साथ ही यह भी देखा जाए कि आबादी वाले रास्तों से भारी वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था लागू है।
मीडिया का सवाल—परिवार को न्याय, गांव को सुरक्षा कब?
मासूम बच्चे की मौत को महज एक सड़क हादसा मानकर फाइल बंद कर देना इस घटना की गंभीरता को कम करना होगा। एक परिवार ने अपना मासूम खोया है और पूरा गांव भय एवं आक्रोश के दौर से गुजर रहा है।
छत्तीसगढ़ लोकदर्शन इस दुखद घटना पर पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और मांग करता है कि बच्चे की मौत की निष्पक्ष जांच हो, दोषी के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो तथा गांव में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
मासूम की मौत किसी राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं—यह व्यवस्था के सामने खड़ा एक कठोर सवाल है।
अब कार्रवाई चाहिए, आश्वासन नहीं।








