राखी बांधने में ग्रहण का कोई व्यवधान नहीं, 27 अगस्त को ही समाप्त हो चुकी भद्रा : सतीश शर्मा जी महाराज
कुरूद। रक्षाबंधन पर्व को लेकर चंद्रग्रहण के संबंध में सोशल मीडिया और जनमानस में फैल रही भ्रांतियों के बीच तहसील ब्राह्मण समाज कुरूद के उपाध्यक्ष एवं भागवताचार्य सतीश शर्मा जी महाराज, ग्राम नारी ने श्रद्धालुओं से भ्रमित न होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 28 अगस्त 2026 को होने वाला आंशिक चंद्रग्रहण भारतवर्ष में दिखाई ही नहीं देगा, इसलिए भारत में रक्षाबंधन पर्व के पालन पर चंद्रग्रहण का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है।
उपलब्ध खगोलीय विवरण के अनुसार 28 अगस्त का आंशिक चंद्रग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के समय चंद्रमा भारत के क्षितिज के नीचे रहेगा। अतः भारत में इसे लेकर अनावश्यक रूप से सूतक अथवा रक्षाबंधन रोकने की भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए।
कहां-कहां दिखाई देगा चंद्रग्रहण?
यह आंशिक चंद्रग्रहण हंगरी, ऑस्ट्रिया, अंटार्कटिक, अटलांटिक, हिंद महासागर, पश्चिमी एशिया, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका, ब्राजील, फ्रांस, आयरलैंड आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा। अर्थात ग्रहण की दृश्यता भारत के बाहर के विभिन्न देशों एवं क्षेत्रों में रहेगी। भारत इस दृश्य क्षेत्र में शामिल नहीं है।
सतीश शर्मा जी महाराज ने कहा कि “जब भारत में चंद्रग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण के नाम पर बहनों को राखी बांधने से रोकना उचित नहीं है। ऐसी भ्रांतियों से सभी को बचना चाहिए।”
रक्षाबंधन के दिन भद्रा भी नहीं
उन्होंने बताया कि भद्रा एक दिन पूर्व 27 अगस्त को प्रातः 9 बजकर 8 मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि 9 बजकर 28 मिनट पर समाप्त हो चुकी है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन भद्रा का कोई व्यवधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि राहुकाल के समय प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक को छोड़कर पूरा दिवस बहनें अपने भाइयों की कलाइयों में राखी बांध सकती हैं। इसी प्रकार पुरोहित एवं ब्राह्मण भी अपने यजमानों को पूरे दिन रक्षासूत्र बांध सकते हैं।
सतीश शर्मा जी महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और रक्षा-संकल्प का पर्व है। इसलिए चंद्रग्रहण को लेकर सोशल मीडिया में चल रही भ्रामक सूचनाओं के कारण पर्व की परंपरा और धार्मिक उत्साह को प्रभावित न होने दें।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पंचांग एवं शास्त्रोक्त जानकारी के आधार पर निश्चिंत होकर रक्षाबंधन पर्व मनाएं।








