शिक्षकों की घोर लापरवाही से टल गया बड़ा हादसा, जिम्मेदारी से बचने के लिए स्वीपर पर दोष मढ़ने का आरोप; डीईओ ने गठित की जांच टीम
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, धमतरी/कुरूद। पीएमश्री प्राथमिक शाला कठौली में शिक्षकों की घोर लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय की छुट्टी के बाद स्कूल में ताला लगा दिया गया, लेकिन कक्षा पहली की एक मासूम छात्रा अंदर ही बंद रह गई। हैरानी की बात यह है कि किसी शिक्षक ने यह तक सुनिश्चित नहीं किया कि सभी बच्चे सुरक्षित घर जा चुके हैं।
छात्रा शाम तक घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। रात करीब 8 बजे विद्यालय परिसर से बच्ची की आवाज सुनाई देने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और ताला तोड़कर उसे बाहर निकाला। कई घंटे तक भूख-प्यास से लड़ती हुई मासूम विद्यालय के कमरे में कैद रही। यदि समय पर उसकी आवाज नहीं सुनाई देती, तो कोई गंभीर अप्रिय घटना भी हो सकती थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना सामने आने के बाद जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कुछ शिक्षक पूरे मामले का ठीकरा विद्यालय के स्वीपर पर फोड़ने का प्रयास करते रहे। जबकि सफाई कर्मचारी अपनी ड्यूटी पूरी कर पहले ही घर जा चुका था। विद्यालय में अंतिम जांच कर यह सुनिश्चित करना कि कोई बच्चा परिसर में न रह जाए, शिक्षकों और प्रभारी की जिम्मेदारी होती है।
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका मिश्रा ने बताया कि शिकायत प्राप्त होते ही जांच टीम गठित कर दी गई है। प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल स्थानीय नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है तथा संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि पीएमश्री जैसे मॉडल स्कूल में यदि एक मासूम घंटों तक बंद रह जाए और किसी को इसकी भनक तक न लगे, तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? ग्रामीणों ने दोषी शिक्षकों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।








