@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरूद। प्रतिभा न अमीरी की मोहताज होती है और न ही सुविधाओं की। मजबूत इरादे, कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक पाते। ग्राम नारी के युवा अमित कुमार सोनकर ने इसे साबित कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए अमित का चयन इंडियन आर्मी में हुआ है, जिससे पूरे गांव और क्षेत्र में गर्व व उत्साह का माहौल है।
अमित स्वर्गीय पंचूराम सोनकर के पुत्र हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी माता के कंधों पर आ गई, जो सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे अमित ने आर्थिक कठिनाइयों को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और निरंतर मेहनत के बल पर भारतीय सेना में स्थान हासिल किया।
अमित के चयन पर ग्राम नारी में भव्य जुलूस निकालकर उनका स्वागत और सम्मान किया गया। मित्रों, ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरे गांव ने इस उपलब्धि को अपने गौरव का क्षण बताया।
सुविधाएं नहीं, फिर भी सेना के लिए तैयार हो रहे दर्जनों युवा
अमित की सफलता के पीछे केवल उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि गांव के उन वरिष्ठ युवाओं का योगदान भी है, जो स्वयं सेना भर्ती की तैयारी कर चुके हैं और अब नई पीढ़ी को निःस्वार्थ प्रशिक्षण दे रहे हैं। युवाओं ने बताया कि उन्होंने अपने निजी संसाधनों और आपसी सहयोग से प्रोजेक्टर, अध्ययन सामग्री और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे हैं, ताकि गांव के युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन मिल सके।
प्रतिदिन स्कूल की छुट्टी के बाद 25 से 30 युवा नियमित रूप से मैदान में पहुंचकर शारीरिक प्रशिक्षण लेते हैं। इसके साथ ही युवाओं द्वारा अग्निवीर, जीडी और अन्य सेना भर्ती परीक्षाओं की ऑनलाइन तथा रिकॉर्डेड कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद गांव के युवा अपने दम पर एक अनुशासित प्रशिक्षण व्यवस्था खड़ी करने में जुटे हुए हैं।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर फूटा युवाओं का दर्द
युवाओं का कहना है कि जिस मैदान में वे देशसेवा का सपना लेकर पसीना बहाते हैं, उसकी स्थिति बेहद खराब है। नया गौठान मैदान उबड़-खाबड़ हो चुका है और भारी ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। कई बार पंचायत और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद कोई प्रभावी पहल नहीं की गई।
युवाओं ने बताया कि मैदान को उपयोगी बनाए रखने के लिए उन्हें स्वयं अपने खर्च पर कई ट्रैक्टर रेत डलवाकर मैदान के हिस्सों को समतल करना पड़ा। इतना ही नहीं, मैदान की सुरक्षा के लिए लगाए गए पोल और तार-कांटे भी असामाजिक तत्व उखाड़कर ले जाते हैं। इसके बावजूद युवाओं ने हार नहीं मानी और अपने निजी खर्च से दोबारा पोल व तार-कांटे लगाकर मैदान को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।
अमित की सफलता व्यवस्था के लिए सवाल
ग्राम नारी के युवाओं का मानना है कि यदि क्षेत्र में एक समुचित खेल मैदान, दौड़ ट्रैक और बुनियादी प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यहां से हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों में चयनित हो सकते हैं।
अमित सोनकर की सफलता आज केवल एक परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन संघर्षशील ग्रामीण युवाओं की जीत है, जो संसाधनों के अभाव में भी देशसेवा का सपना संजोए हुए हैं। यह सफलता जहां गांव का गौरव बढ़ा रही है, वहीं स्थानीय व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल भी पूछ रही है कि जब बिना किसी सरकारी सुविधा के युवा सेना तक पहुंच सकते हैं, तो उचित संसाधन मिलने पर यह क्षेत्र देश को कितने और अमित सोनकर दे सकता है?








