@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, बलरामपुर। बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत डीपाडीह खुर्द गांव से एक बेहद मार्मिक और चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई है. गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने गई 4 साल की मासूम बच्ची की तालाब में डूबने से मौत हो गई. यह हादसा आंगनबाड़ी व्यवस्था में लापरवाही और सुरक्षा प्रबंधों की भारी कमी की ओर साफ इशारा करता है.
मिली जानकारी के मुताबिक बच्ची रुक्मिणी माता बबली आंगनबाड़ी में अध्ययन के दौरान खेलते हुए परिसर से निकलकर पास ही स्थित तालाब तक जा पहुंची। वहां उसका पैर फिसल गया और वह पानी में गिर गई. सबसे फिक्र वाली बात यह रही कि हादसे के समय वहां कोई देखरेख करने वाला नहीं था. वक़्त पर मदद न मिलने की वजह से बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई.
हादसे की खबर जैसे ही गांव में फैली. पूरे क्षेत्र में शोक और अफरा-तफरी का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने बच्ची को तालाब से बाहर निकाला. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. बच्ची के माता-पिता बदहवास हैं और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति की जा रही है. जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक हैं.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की गई है. बच्ची के पिता की मौत पहले ही हो चुकी है वहीं उसकी माता की मानसिक हालत सही नहीं रहती है. ऐसे में पूरा मामला जांच का विषय बना हुआ है.
यह घटना कई बड़े सवालों को जन्म देती है:
बच्ची आंगनबाड़ी के पीछे तालाब तक आखिर पहुंची कैसे?
क्या भवन में सुरक्षित बाउंड्री वॉल या गेट नहीं था?
उस समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका कहां थीं?
क्या बच्चों की निगरानी के लिए पर्याप्त स्टाफ मौजूद था?
अगर बच्ची आंगनबाड़ी में मौजूद थी तो उसकी अनुपस्थिति पर तुरंत ध्यान क्यों नहीं दिया गया?
थाना प्रभारी जितेंद्र जायसवाल ने कहा कि मामला की जांच की जा रही है. जांच के बाद दोषी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस बारे में मिडिया ने शंकरगढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी जयगोविंद तिवारी से उनका पक्ष लेने की कोशिश की. लेकिन उनके द्वारा फोन नहीं रिसीव किया गया।








