@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कोरबा/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की बारिश राहत के बजाय आफत बनकर बरस रही है। प्रदेश के कई जिलों में हो रही मूसलाधार बारिश ने जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कोरबा और सूरजपुर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां नदी-नाले उफान पर हैं, स्टॉप डैम टूट गया है और कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
कोरबा में बाढ़ का कहर: 20 एकड़ फसल जलमग्न, 20 साल पुराना पुल बहा
कोरबा जिले के करतला ब्लॉक में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। यहां बांसाझार्रा में बना स्टॉप डैम पानी के प्रचंड वेग के आगे टिक नहीं पाया और टूटकर बह गया। डैम टूटने से उसका पानी आसपास के खेतों में घुस गया, जिससे किसानों की लगभग 20 एकड़ की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है।
यही नहीं, बारिश का कहर 20 साल पुराने एक पुल पर भी बरपा, जो पानी के तेज बहाव में बह गया। इस पुल के टूटने से क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूरजपुर में उफान पर नदी-नाले, जान जोखिम में डालने को मजबूर लोग
सूरजपुर जिले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां रामानुजनगर ब्लॉक में कई पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है। देवनगर से पोड़ी और धनेशपुर से पण्डरी को जोड़ने वाले मार्गों पर बने पुल पानी में डूबे हुए हैं।
इसके चलते दो दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के कामों और जरूरतों के लिए 25 से 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है, जो न केवल थकाने वाला है बल्कि खतरनाक भी है।
बढ़ा दुर्घटना का खतरा, प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल
पुलों के ऊपर से बहते तेज पानी के बीच से गुजरना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है। इसके बावजूद, कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर इन मार्गों को पार करने के लिए मजबूर हैं। सामने आई तस्वीरें साफ बयां कर रही हैं कि किस तरह बारिश के पानी ने सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे लोगों की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं।








