@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, कुरुद। ग्राम नारी में महानदी रेत उत्खनन लगातार जारी है। शासन के औपचारिक नियमानुसार 15 जून से रेत उत्खनन पर विराम लग जाता है। यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों के मिलीभगत से पहले तो बदस्तूर रेत उत्खनन चला अब रात में भी हाइवा लगना शुरू हो गया है। अवैध रेत थमने का नाम नहीं ले रहा है। मानों महानदी के तटीय इलाकों में रेत का व्यवसाय अब सबके जीवन रोटी का आधार बन गया है।
आप किसी एक को दोषी नहीं कह सकते
इस अवैध उत्खनन का कोई एक दोषी नहीं है, रसूखदार माफियाओं से लेकर स्थानीय लोग, पंच, सरपंच का बकायदा कमीशन सेट है। बकायदा कमीशन एजेंट भी रखे हुए हैं किसी व्यक्ति को कोई आपत्ति हो तो उन्हे भी कमीशन का ऑफर मिलता है यदि न माने तो कुछ स्थानीय गुर्गे आपको धौंस दिखाकर चले जाएंगे क्योंकि इसे इसलिए ही पाला जा रहा है कि कोई रोक–टोक करे तो वहां दादागिरी करना है। कोई विरोध की हिम्मत इसलिए भी नहीं जुटाते कि राजनीति हावी हो जाती है। व्यक्तिगत हो गांव किसी भी गंभीर मुद्दे पर पुलिस को आने में समय लग सकता है। आप रेत उत्खनन के विरोध का हिमाकत करेंगे तो रात में ही पुलिस पकड़कर ले जाएगी।
100% अवैध उत्खनन हुआ है, कोई एक सवाल का उत्तर दे प्रशासन…!
भले ही शासन दावा करती है कि नारी रेत खदान विधि संगत तरीके के चला है। उनका यह दावा जानकारी नहीं रखने वालों तक प्रभावी हो सकता है लेकिन यह स्पष्ट है यहां शासन प्रशासन के नाक के नीचे अवैध रूप से उत्खनन हुआ है। जो सबके सामने विदित है जब वैध है तो इतने बड़े कमीशन गैंग क्यों तैयार किया? माउंटेन मशीन से उत्खनन क्यों कराया गया? फर्जी पीटपास क्यों बाटा गया? अलग अलग तिथि और समय और अलग अलग खदानों का पीटपास क्यों दिया? यह सब प्रमाणिक सवाल हैं। बिना क्षमता के सीसी रोड ओवर लोड हाइवा क्यों चल रहा है? खदानों में जीपीएस सिस्टम क्यों नहीं लगा? प्रशासन के नियतकाल का पालन क्यों नहीं हुआ? घन मीटर और निश्चित क्षेत्रफल में खुदाई के मापदंड का पालन क्यों नहीं किया गया? हाइवा से रेत ढककर क्यों नही ले जाया गया? विरोध करने वालों पर कमीशन का ऑफर क्यों किया गया? माइनिंग के आने के पूर्व ही सूचना लीक कैसे हो जाता है?आदि आदि तरह तरह के सवाल हैं जो काफी हैं, यह स्पष्ट करने के लिए कि यह काला धंधा से लाल हो जाने का अच्छा अवैध कारोबार है।








