@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, बिलासपुर। बिलासपुर में धर्म परिवर्तन का बड़ा खुलासा हुआ है । बिलासपुर में धर्म परिवर्तन कराने के एक कथित रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। तोरवा थाना क्षेत्र में अवैध रूप से धर्मांतरण का केंद्र चलाने के आरोप में एक पास्टर और महिलाओं समेत कुल 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई हिंदू संगठनों द्वारा किए गए एक बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद हुई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिलासपुर के तोरवा स्थित केवट पारा का है। यहाँ के निवासी अशोक सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि इलाके में एक धर्मांतरण केंद्र चलाया जा रहा है।
शिकायत है कि पास्टर विनय सिंह और उसके सहयोगी प्रार्थना सभा का आयोजन करते थे।लोगों को, खासकर गरीब और जरूरतमंदों को, पैसों का लालच देकर इन सभाओं में बुलाया जाता था। इन पर आरोप है कि यहाँ धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें अपना धर्म बदलने के लिए उकसाया जाता था।
7 घंटे का हंगामा, तब जागी पुलिस
मामला तब गरमाया जब हिंदू संगठनों को इस कथित धर्मांतरण केंद्र की भनक लगी। इसके बाद आक्रोशित संगठन के सदस्य और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में तोरवा थाने पहुंच गए। उन्होंने थाने का घेराव कर आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब 7 घंटे तक चला, जिसके दबाव में आकर पुलिस को सख्त एक्शन लेना पड़ा।
पास्टर और महिलाओं समेत 7 पर FIR
लंबे चले हंगामे और प्रदर्शन के बाद पुलिस ने अशोक सिंह की शिकायत के आधार पर नामजद FIR दर्ज कर ली है। आरोपियों में मुख्य पास्टर विनय सिंह के अलावा कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी 7 आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस अधिनियम का उद्देश्य जबरन, धोखे से या लालच देकर होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। पुलिस अब मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।








