संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। नववर्ष 2026 के स्वागत को लेकर धर्मनगरी राजिम में श्रद्धालुओं की आवाजाही अभी से तेज हो गई है। बीते रविवार को सुबह से शाम तक करीब 15 हजार से अधिक श्रद्धालु राजिम पहुंचे, जबकि प्रतिदिन पर्यटकों और भक्तों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अनुमान है कि 1 जनवरी को श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख के आंकड़े को पार कर सकती है।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर परिसरों और घाटों पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ सकता है।

श्री राजीवलोचन मंदिर में होगा विशेष श्रृंगार
श्री राजीवलोचन मंदिर के सर्वराकार चंद्रभान सिंह ठाकुर ने बताया कि 1 जनवरी, गुरुवार को भगवान श्री राजीवलोचन का विशेष श्रृंगार एवं भव्य पूजा-अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु दर्शन-पूजन, स्नान और धार्मिक भ्रमण के साथ पूरा दिन धर्मनगरी में व्यतीत करते हैं।

राजिम को “हरि और हर की नगरी” कहा जाता है। यहां भगवान विष्णु के श्री राजीवलोचन मंदिर के साथ-साथ पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव सहित अनेक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जहां मूर्तिकला और चित्रकला के उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलते हैं।

त्रिवेणी संगम: आस्था का केंद्र
राजिम में सोंढूर, पैरी और महानदी नदियों का संगम होने के कारण इसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के समीप स्थित इस संगम में वर्षभर स्नान, दान और तर्पण के लिए श्रद्धालु आते रहते हैं।
सोन तीर्थ घाट, अटल घाट, संगम घाट, नेहरू घाट और बेलाही घाट विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
विशेष बात यह है कि यहां तीन जिलों का संगम भी होता है—
- पश्चिम: नवापारा (रायपुर जिला)
- दक्षिण-पश्चिम: नवागांव (धमतरी जिला)
- पूर्व: राजिम (गरियाबंद जिला)
लक्ष्मण झूला बना श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगभग 33 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लक्ष्मण झूला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। इसके माध्यम से श्रद्धालु कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर और लोमस ऋषि आश्रम तक सहजता से पहुंच रहे हैं। झूले पर चढ़ने को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
राजीवलोचन का अटिका प्रसाद: स्वाद की पहचान
जिस प्रकार आगरा का पेठा और देवभोग का खाजा प्रसिद्ध है, उसी तरह राजिम का अटिका प्रसाद भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। शुद्ध घी से निर्मित यह प्रसाद महीनों तक खराब नहीं होता।
पुजारी महेंद्र सिंह ठाकुर के अनुसार भगवान श्री राजीवलोचन को दाल, चावल, सब्जी, अनरसा, मक्खन, दूध, मिठाई और ऋतु फल का भोग लगाया जाता है। महंगाई के चलते अटिका प्रसाद की मात्रा में भले ही कमी आई हो, लेकिन इसकी श्रद्धा और स्वाद आज भी बरकरार है।
नववर्ष पर क्या करें: विद्वानों की सलाह
विद्वानों के अनुसार नववर्ष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, स्वच्छ वस्त्र धारण, पूजा-पाठ, दान-पुण्य, सकारात्मक वातावरण और आलस्य से दूरी बनाए रखना शुभ माना जाता है।
राजिम के अलावा जिले के अन्य प्रमुख पर्यटन व धार्मिक स्थलों—जतमई, घटारानी, रमईपाठ, भूतेश्वरनाथ महादेव, सिद्ध खोल, गरजई माता, टेंगनही माता—में भी नववर्ष पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।








