@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की अनूठी अनुभूति के बीच श्याम वर्ण पाषाण से निर्मित विश्व की प्रथम 1008 श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा आज गाजे-बाजे के साथ नयापारा श्री दिगंबर जैन मंदिर पहुँची। नगरवासियों, श्वेतांबर समाज, विभिन्न सामाजिक वर्गों और गणमान्य नागरिकों ने अत्यंत श्रद्धा से भगवान का स्वागत किया और सामूहिक आरती कर मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
63 इंच ऊँची यह दिव्य प्रतिमा दक्षिण भारत के दुर्लभ जेड ब्लैक पाषाण से निर्मित है, जो विश्व में अपनी तरह की इकलौती प्रतिमा मानी जा रही है। अलौकिक, आकर्षक व तेजोमय स्वरूप वाली यह प्रतिमा नव निर्मित मंदिर में मूलनायक भगवान के रूप में विराजमान होगी, जिसके आगमन से संपूर्ण अंचल में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का संदेश व्याप्त हुआ।
प्रतिष्ठा समारोह के अनुसार, मूलनायक भगवान सहित अन्य सभी प्रतिमाओं की भव्य प्रतिष्ठा 19 से 25 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव में की जाएगी।
भक्तों के लिए यह क्षण अत्यंत दुर्लभ और अविस्मरणीय रहा जब पहली बार अपने नेत्रों से भगवान को मूल वेदिका में विराजमान होते देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह संपूर्ण प्रक्रिया समाज के वरिष्ठ सदस्य श्री सुरीत जैन के निर्देशन में जयपुर से आए विशेषज्ञों द्वारा विधि-विधान से सम्पन्न कराई गई। समाज के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहयोग देकर इस ऐतिहासिक क्षण को साकार किया।
भगवान के मंदिर पहुँचे के बाद सर्वप्रथम भक्ति व प्रार्थना पाठ हुआ। तत्पश्चात पंडित ऋषभ चंद शास्त्री द्वारा वेदिका में विराजमान कराने से पूर्व पूजा-अर्चना की विधि प्रारंभ की गई। इस अवसर पर समाज संरक्षक श्री रमेश पहाड़िया, अध्यक्ष अखिलेश नाहर, पुण्यजक परिवार राजकुमार-पियूष-पंकज-श्रद्धा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दोपहर 12:30 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से आरंभ हुई भगवान की भव्य शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ गंज रोड, पुराना बस स्टैंड होते हुए सदर रोड स्थित नवीन जिनालय पहुँची, जहाँ प्रतिमा को विधि-विधान से विराजित किया गया।
नगर में आज का दिन आध्यात्मिक उत्सव, आस्था और अद्भुत श्रद्धा का अनुपम संगम बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।








