संवाददाता तुकाराम कंसारी
विप्र महिला मंडल नवापारा की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखाई प्रतिभा
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। विप्र महिला मंडल नवापारा द्वारा उमंग तीज मिलन समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ किया गया। सर्व ब्राह्मण समाज की महिलाओं की सहभागिता से यह कार्यक्रम सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति का प्रतीक बन गया।

महिलाओं ने तीज पर्व के अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य प्रतियोगिता, संगीत एवं भजन प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों और युवतियों ने भी अपनी छुपी हुई प्रतिभा को मंच पर प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। पूरे कार्यक्रम में “महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा” की भावना जीवंत रही।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्वेता पांडे (संजिवनी हॉस्पिटल), श्रीमती सीमा शर्मा (जनपद सदस्य फिंगेश्वर), श्रीमती वर्षा संतोष मिश्रा (जनपद सदस्य अभनपुर), श्रीमती तनु मिश्रा (सर्व ब्राह्मण समाज राष्ट्रीय सचिव), श्रीमती तारिणी शर्मा (सर्व ब्राह्मण समाज अध्यक्ष नवापारा), श्रीमती किरण तिवारी (उपाध्यक्ष सर्व ब्राह्मण समाज नवापारा), श्रीमती पुष्पलता दुबे, डॉ. मधुरानी शुक्ला, श्रीमती सुनीता शर्मा सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
महिलाओं ने पारंपरिक पीली साड़ी पहनकर एकरूपता और सामूहिकता का संदेश दिया। तीज पर्व की स्मृतियों को संजोते हुए सुहाग सामग्री व उपहारों का वितरण भी किया गया।
भजन प्रतियोगिता में देवकुमारी मिश्रा, तृप्ति शर्मा, रानी शर्मा, भावना शर्मा, स्वाति शुक्ला, नेहा दुबे, पूजा पांडे, तारिणी शर्मा, वर्षा मिश्रा, रानी तिवारी आदि ने अपनी मधुर प्रस्तुतियाँ दीं। वहीं नृत्य प्रतियोगिता में पूजा शर्मा, बरखा दुबे, नीरजा पांडे, कृष्णा शर्मा, स्वाति उपाध्याय, नूपुर शर्मा, प्रतिभा शर्मा, विद्या तिवारी, किरण तिवारी, रश्मि तिवारी समेत अनेक महिलाओं ने अपनी शानदार प्रस्तुतियाँ दीं।
समारोह के दौरान महिलाओं ने “परशुराम की जय” घोष के साथ समाज की एकता व अखंडता का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन रेणुका तिवारी ने कुशलतापूर्वक किया।
विप्र महिला मंडल नवापारा का यह आयोजन सामाजिक समरसता और महिला शक्ति के सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर सामने आया। हरितालिका तीज के पावन अवसर पर यह मिलन समारोह महिलाओं के लिए मायके की याद, सखी-सहेलियों के संग हंसी-ठिठोली और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनूठा मंच सिद्ध हुआ।








