@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, रायपुर/दंतेवाड़ा-बीजापुर।छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) एक बड़े भ्रष्टाचार के घेरे में है। दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में गरीबों के हक का राशन—घटिया और सड़ा-गला चावल—बांटे जाने से सरकारी दावों की पोल खुल गई है। गीदम वेयरहाउस में जमा चावल की बदहाली ने न सिर्फ खाद्य आपूर्ति तंत्र को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि हजारों परिवारों की सेहत को सीधे खतरे में डाल दिया है।
बोरियों से ‘चावल’ नहीं, निकल रहे ढेले
खराब स्टॉक की पुष्टि होते ही प्रशासन ने धमतरी से विशेष ग्रेडिंग-सफाई मशीनें मंगवाईं। सफाई के दौरान चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई—बोरियों से अनाज की जगह 4–5 किलो के जमे हुए ‘चावल के लड्डू’ निकल रहे हैं। अब तक करीब 30 हजार क्विंटल चावल की सफाई की जा चुकी है, लेकिन वेयरहाउस में मौजूद स्टॉक की हालत ने अफसरों की नींद उड़ा दी है।
कुआकोंडा–भैरमगढ़ में राशन संकट, जनता आक्रोशित
खराब स्टॉक के कारण भैरमगढ़ और कुआकोंडा ब्लॉकों में राशन वितरण ठप है। उचित मूल्य दुकानों पर चावल नहीं पहुंच रहा, उपभोक्ता खाली हाथ लौट रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में उबाल है—गरीबों के हक के साथ खुलेआम खेल!
पकाने पर लाल पड़ता चावल—स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़
स्थानीय लोगों की शिकायतें गंभीर हैं। वितरित चावल पकाने पर लाल रंग का हो रहा है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक नमी, खराब भंडारण और संभव फंगस/केमिकल रिएक्शन इसकी वजह हो सकते हैं—यानी थाली में ज़हर!
क्वालिटी रिपोर्ट में ‘बड़ा खेल’—मिलीभगत उजागर
जांच में सामने आया है कि भंडारण से पहले क्वालिटी चेक में भारी हेराफेरी हुई। कई राइस मिलर्स ने घटिया चावल सप्लाई किया, जिसे अधिकारियों ने मिलीभगत कर “मानक के अनुरूप” बताकर पास कर दिया। गलत रिपोर्ट के आधार पर वेयरहाउस में खराब माल भर दिया गया—और अब कीमत जनता चुका रही है।
करोड़ों का नुकसान, सख्त कार्रवाई तय
इस लापरवाही से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत की आशंका है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। रिपोर्ट आते ही दोषी राइस मिलर्स को ब्लैकलिस्ट, जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित, और सभी पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
सबक और समाधान: सप्लाई चेन पर कड़ा पहरा जरूरी
यह घोटाला धान खरीदी से लेकर भंडारण और वितरण तक की पूरी श्रृंखला पर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है डिजिटल मॉनिटरिंग, रियल-टाइम स्टॉक ट्रैकिंग, थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट और जीरो टॉलरेंस नीति की—ताकि गरीबों की थाली सुरक्षित रहे और भ्रष्टाचार पर निर्णायक वार हो।
यह सिर्फ खराब चावल का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम में सड़े हुए तंत्र का खुलासा है। अब देखना है—कार्रवाई कागजों तक सीमित रहती है या दोषियों पर सच में कड़ा एक्शन होता है।








