सुषमा के स्नेहिल सृजन….
(छंद-मनहरण घनाक्षरी)
फौजी भैया
सावन पूनम दिन, बंधन राखी के बिन,
खाली न हो हाथ कोई,
भैय्या मैं बनाऊँगी।चेहरे में ख़ुशी लिए, फौजी भैया मुझे मिले,
कलाई रेशम डोरी,
’सुषमा’ सजाऊँगी।आरती सजाऊँ थाल, तिलक लगाऊँ भाल,
रक्षा पर्व त्योहार में,
राखी पहनाऊँगी।सहस्र दुआएँ माँगूँ, रक्षासूत्र हाथ बाँधूँ,
राजा भैया कहकर,
मिठाई खिलाऊँगी।
———————————✍️कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल, रायपुर (छत्तीसगढ़)








