संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। शासकीय राजीव लोचन कॉलेज में एमएससी केमिस्ट्री की पढ़ाई के इंतजार में सैकड़ो छात्र-छात्राएं बैठे हुए हैं। उन्हें भरोसा है कि इसी सत्र से ही पढ़ाई शुरू हो जाएगी, परंतु नवीन शिक्षा सत्र शुरू हो गया है और अभी भी उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा आदेश नहीं आया है। छात्र रूपेंद्र सेन, हेमंत यादव, सोमेश साहू, लव ध्रुव, थनेश्वर साहू, आंचल राजपूत, हेमलता साहू, डेनिश साहू, खुशबू ढीढी, लिलेश्वरी यदु, चांदनी देवांगन, गीतिका देवांगन, गणेश्वरी चेलक ने बताया कि हमारा बीएससी कंप्लीट हो गया है और इसके बाद एमएससी इसी कॉलेज से ही करने की सोच रखे हैं। पिछले सत्र में ही चर्चा चल रही थी कि इस सत्र से एमएससी में केमिस्ट्री हो जाएगी लेकिन अभी तक आदेश नहीं आने से हम निराश हुए हैं। उल्लेखनीय है कि प्राचीन नगरी राजिम धर्म धारा होने के साथ-साथ शिक्षा का भी केंद्र हो सकता है। वैसे भी यह विधानसभा मुख्यालय है। यहां से अविभाजित मध्यप्रदेश को तीन बार मुख्यमंत्री मिल चुका है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद जोगी मंत्रिमंडल में पहली बार में ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिला है। उसके बाद से लगातार सत्ता पक्ष से ही प्रतिनिधि चुनकर जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सन 1972 में शासकीय राजीव लोचन महाविद्यालय की स्थापना शहर के रानी श्याम कुमारी देवी धर्मशाला में हुई थी जो किराए की भवन में संचालित हो रहे थे। मध्य प्रदेश सरकार ने चिंता की और बजट में राशि स्वीकृत किया गया तथा 90 के दशक में नवीन भवन बनकर तैयार हो गया और यही पढ़ाई होने लगी।
53 सालों में नहीं हो पाया एमएससी केमेस्ट्री
पिछले 53 सालों में एमएससी केमिस्ट्री की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है यह इस क्षेत्र के लिए सोचनीय विषय बन गया है। यदि इस विषय को लेकर छात्र आगे की पढ़ाई करना चाहे तो उन्हें रायपुर जिला के अलावा अन्य दूसरे शहरों के शरण लेने पड़ रहे हैं। आजकल पढ़ाई का खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में छात्र-छात्राएं या तो आगे की पढ़ाई ही छोड़ रहे हैं या फिर शिक्षा ग्रहण करने के नाम पर शहर से पलायन कर मोटी रकम खर्च करते हुए दूसरी कॉलेजों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर है। इतने पुराने कॉलेज होने के बाद तो यहां एमएससी केमिस्ट्री का विषय कब का हो जाना चाहिए था परंतु राजिम का सौभाग्य ही नहीं बन पाया है। जिले का यहां सबसे पुरानी कॉलेज है। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में तो यह शहर शिक्षा का केंद्र होना चाहिए था।
अभी तक व्यावसायिक पाठ्यक्रम नहीं खुल पाया
बताया जाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में राजिम पिछड़ा हुआ प्रतीत होता है। उच्च शिक्षा के लिए अभी तक मात्र ग्रेजुएशन में एम. ए. अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, हिंदी साहित्य, एम काम., एमएससी साइंस ग्रुप में बॉटनी, फिजिक्स के अलावा स्ववित्तीय पाठ्यक्रम एमएसडब्ल्यू, पीजीडीसीए, योगा तक ही सीमित है। आगे के व्यवसायिक पाठ्यक्रम के लिए छात्र-छात्राओं को दूसरे प्रदेश या फिर दूसरे शहरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। यहां लंबे समय से इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, शिक्षा महाविद्यालय, आईटीआई की हो रही है किंतु अभी तक कोई सौगात नहीं मिल पाया है। पहले भी छात्र-छात्राएं सुविधाएं नहीं होने के कारण पढ़ाई छोड़कर रोजी मजदूरी कर रहे हैं। अभी भी वही स्थिति निर्मित है। कुछ महीने पहले ही नगर पंचायत अध्यक्ष महेश यादव ने राजिम में आईटीआई खोलने की मांग को लेकर राजिम विधायक रोहित साहू को ज्ञापन सौंपा था।
छात्र-छात्राओं तथा पालकों की मांग राजिम को बनाए शिक्षा का केंद्र
पुरुषोत्तम सेन, संतोष कुमार सोनकर, रामकुमार देवांगन, महेंद्र कुमार, विश्वास साहू, घनश्याम साहू, राम पटेल, दीपक वर्मा इत्यादि लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राजिम विधायक रोहित साहू से मांग किया है कि राजिम को धर्म नगरी के साथ-साथ शिक्षा का केंद्र बनाएं।
प्राचार्य ने कहा- अभी तक आदेश नहीं आया है
इस संबंध में शासकीय राजीवमलोचन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सविता मिश्रा ने बताया कि एमएससी केमिस्ट्री राजिम कॉलेज में नहीं है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे गए हैं परंतु अभी तक आदेश नहीं आया है।








