संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम।
भारत की धर्म-पताका सदैव विश्व में ऊँची रही है। गोबरा नवापारा की पावन धरती भी उसी आध्यात्मिक परंपरा की साक्षी रही है, जहाँ प्राचीन काल से ऋषि-मुनि, संत-साधक आत्मज्ञान के शोध में लीन रहे हैं। वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में आत्मज्ञान के अमूल्य रत्न बिखरे पड़े हैं, जिन्हें जीवन में उतारने वाला व्यक्ति अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
लगभग 600 वर्ष पूर्व इसी भारत भूमि पर ऐसे महापुरुष का प्रादुर्भाव हुआ, जिन्हें हम संत कबीर साहेब के नाम से जानते हैं। एक ओर उन्होंने अंधविश्वास और पाखंड के विरुद्ध निर्भीक होकर मशाल उठाई, तो दूसरी ओर प्रेम, मानवता और समरसता का शीतल प्रवाह समाज को प्रदान किया। सतगुरु कबीर का गहन चिंतन, निष्पक्षता, निर्भीकता और सत्य को उद्घाटित करने वाली वाणी आज भी जन-जन के हृदय को सुगंधित कर रही है।
इसी पावन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री कबीर संस्थान नवापारा राजिम के तत्वावधान में 44वां वार्षिक अधिवेशन एवं तीन दिवसीय सत्संग समारोह का आयोजन दिनांक 30, 31 जनवरी एवं 1 फरवरी 2026 (शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार) को किया जा रहा है।
इस आध्यात्मिक आयोजन में परम पूज्य वैराग्यवान ज्ञानी, भमनशील श्रद्धेय संत श्री धर्मेंद्र साहेब जी (प्रयागराज/इलाहाबाद) अपनी संत मंडली सहित पधार रहे हैं। साथ ही संत गुरु भूषण साहेब जी (कबीर आश्रम, सूरत) का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संत-महंत, साध्वीजन तथा प्रसिद्ध भजन गायक श्री गुरुशरण साहू (भेंडरी) एवं श्री सूरज मास्टर (नवापारा) की भी विशेष प्रस्तुति रहेगी।
कार्यक्रम विवरण:
- भजन एवं प्रवचन:
- प्रातः 10:00 बजे से 1:30 बजे तक
- अपराह्न 3:00 बजे से 5:30 बजे तक
- दिनांक 1 फरवरी 2026 को प्रथम सत्र में गुरु पूजा का आयोजन होगा।
श्री कबीर संस्थान नवापारा राजिम ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे सह-परिवार उपस्थित होकर इस सत्संग एवं आध्यात्मिक आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त करें और संत कबीर के मानवतावादी संदेशों को जीवन में आत्मसात करें।
