संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम।
शहर के बाजार में इन दिनों पोषक तत्वों से भरपूर मौसमी सीताफल की आमद शुरू हो गई है। मंगलवार को इस वर्ष पहली बार बाजार में सीताफल दिखाई दिए, जिन्हें लोग बड़ी उत्सुकता के साथ खरीदते देखे गए। बाजार में विक्रेता सीताफल को ₹200 प्रति किलो की दर से बेच रही हैं और खरीददार भी अच्छी संख्या में पहुँचे।
जानकारी के अनुसार, सीताफल का फूल आने के लगभग चार महीने बाद सितंबर-अक्टूबर में फल पकने लगता है। इस वर्ष सितंबर के दूसरे सप्ताह में ही सीताफल की आवक शुरू हो गई है और ग्राहकों में इसकी मांग बढ़ती जा रही है। यह फल न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है।
सीताफल में विटामिन सी और विटामिन बी6 भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने और न्यूरोट्रांसमीटर निर्माण में मदद करते हैं। इसके साथ ही यह एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भी समृद्ध है। मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे खनिज तत्व रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका सेवन उचित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में खाने से नुकसान भी हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सीताफल का पौधा लगाने के लगभग डेढ़ से दो वर्षों में फूल देना शुरू करता है और फल आने में तीन से चार साल लग सकते हैं। भरपूर उत्पादन के लिए पौधे को 5×5 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है, उपजाऊ मिट्टी और गोबर की खाद का उपयोग कर जल निकासी का ध्यान रखा जाता है। गर्मियों में सिंचाई और समय-समय पर कीट नियंत्रण तथा छंटाई आवश्यक है।
भारत में महाराष्ट्र सीताफल का प्रमुख उत्पादक राज्य है, जहाँ कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा होता है। इसके अलावा मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड, असम और उत्तरप्रदेश में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। छत्तीसगढ़ के गाँव, शहर और बाड़ी में भी सीताफल के पेड़ देखे जाते हैं। यहाँ कई स्थानों पर बगीचों से तोड़कर बड़े पैमाने पर फल बाजारों में बेचे जाते हैं। इस बार अच्छी आवक की संभावना जताई जा रही है।
स्वाद और सुगंध में लाजवाब सीताफल न केवल बच्चों बल्कि हर उम्र के लोगों के पसंदीदा फलों में शामिल हो चुका है। विशेषज्ञों और विक्रेताओं का मानना है कि उचित मात्रा में सेवन कर इसे अपने आहार में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रहेगा।








