संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक एवं छत्तीसगढ़ ब्रह्मचर्य आश्रम के संस्थापक पंडित सुंदरलाल शर्मा की 144वीं पुण्यतिथि 28 दिसंबर को पंडित सुंदरलाल शर्मा चौक स्थित उनकी प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंडित सुंदरलाल शर्मा छत्तीसगढ़ में जन-जागरण और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत रहे। उन्होंने ग्रामीण अंचलों में फैली रूढ़िवादिता, अंधविश्वास और कुरीतियों के उन्मूलन के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके समाज सुधार कार्यों की प्रशंसा स्वयं महात्मा गांधी ने मुक्त कंठ से की थी और उन्हें अपना मार्गदर्शक माना था।
सन 1920 में कंडेल नहर सत्याग्रह पंडित सुंदरलाल शर्मा के नेतृत्व में ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। उनके प्रयासों से ही महात्मा गांधी 20 दिसंबर 1920 को पहली बार रायपुर आए। असहयोग आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ से जेल जाने वालों में पंडित सुंदरलाल शर्मा प्रमुख रहे।
सादा जीवन, उच्च विचार के आदर्शों पर चलते हुए निरंतर समाज सेवा और कठोर परिश्रम के कारण उनका शरीर क्षीण होता गया और 28 दिसंबर 1940 को उनका निधन हुआ।
सफाई मित्रों का हुआ सम्मान
पुण्यतिथि के अवसर पर नगर के सफाई मित्र भाइयों एवं बहनों का सम्मान कर सामाजिक समरसता और सम्मान का संदेश दिया गया। सभी सफाई मित्रों को अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मान कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पंडित सुंदरलाल शर्मा के प्रपौत्र विकास शर्मा, संजय कबीर शर्मा, मीर अली मीर, नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव, देवेंद्र शर्मा, लीलेश्वर यदु, तुषार कदम, अजय पटेल, आकाश सिंह राजपूत सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।








