संवाददाता तुकाराम कंसारी
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। ठंड का मौसम शुरू होते ही जहाँ आमतौर पर सब्जियों के दाम नरम पड़ जाते थे, वहीं इस बार बाजार में कीमतें बेकाबू होकर आसमान छू रही हैं। महंगाई की इस तेज़ मार ने आम परिवारों के बजट को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की रसोई चलाना अब लोगों के लिए चुनौती बन गया है।
आलम यह है कि जो परिवार पहले दो समय सब्जी बनाते थे, वे अब मजबूरन एक समय सब्जी और एक समय दाल बनाकर गुजारा कर रहे हैं। महँगाई ने आम आदमी की थाली से रंग और पोषण दोनों छीन लिए हैं।
स्थानीय नागरिक ओमप्रकाश साहू, रवि निर्मलकर, अजय यादव, नीलकंठ तारक, लक्की साहू, सोनू यादव, विजय दाढ़े, लोकेश मन्होत्रा सहित अन्य लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि—
“हर साल ठंड में सब्जियाँ सस्ती मिलती थीं, पर इस बार तो दामों में आग लगी हुई है। घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।”
बाजार में इस समय सब्जियों के दाम कुछ इस प्रकार हैं—
- टमाटर – ₹60 प्रति किलो
- मूली – ₹40 प्रति किलो
- बरबट्टी (काला) – ₹80 प्रति किलो
- बरबट्टी (सफेद) – ₹70 प्रति किलो
- भिंडी – ₹80 प्रति किलो
- करेला – ₹80 प्रति किलो
- लाल भाजी – ₹40 प्रति किलो
अन्य हरी सब्जियाँ भी इसी तरह ऊँचे रेट पर बिक रही हैं।
जब सब्जियों के बढ़े दामों के कारणों पर एक सब्जी विक्रेता से बात की गई, तो उसने बताया कि बाहर से आने वाली सब्जियों की आवक इस समय काफी कम हो गई है। सप्लाई घटने से बाजार में कमी हो रही है और इसी के चलते दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं।
महंगाई के इस दौर में आम आदमी की थाली हल्की होती जा रही है और चिंता भारी। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही सब्जियों की आवक बढ़े और दाम सामान्य स्तर पर लौटें, ताकि रसोई का धुआँ फिर पहले की तरह आसानी से चलता रहे।








