संवाददाता तुकाराम कंसारी

@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, राजिम। संत कवि स्वामी अमृतानंद पवन दीवान की पुण्यतिथि के मौके पर पवन दीवान आश्रम में सुबह से ही  शिष्य और उनके चाहने वाले लोग जुटने लगे, देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित किया।

मौके पर पादुका पूजन के साथ ही शिव अभिषेक का कार्यक्रम  संपन्न हुआ। आश्रम के बच्चों के द्वारा मंत्रोचार किया गया तथा भजन संध्या मंडली के द्वारा भजन कीर्तन का कार्यक्रम अपराह्न 1:00 बजे तक चलता रहा। शिवजी और हनुमान जी की महाआरती हुई तथा प्रसाद वितरण किया गया।

मौके पर स्वामी अमृतानंद पवन दीवान स्मृति छत्तीसगढ़ ब्रह्मचर्य आश्रम न्यास समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय, सचिव अनिल तिवारी, पंडित अर्जुन नयन तिवारी,सदस्य विकास तिवारी, कन्हैया तिवारी, डीके ठाकुर,  आचार्य पंडित रोशन शास्त्री, पंडित अमित तिवारी, प्रबंधक नूतन तिवारी, पुरुषोत्तम मिश्रा, विकास शर्मा, रमेश पहाड़िया, साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सन 2016 में ब्रह्मलीन हुए थे संत कवि पवन दीवान

उल्लेखनीय है कि संत कवि पवन दीवान 2 मार्च सन 2016 में ब्रह्मलीन हुए थे उस समय राजिम कुंभ कल्प मेला का आयोजन चल रहा था। इनके अंतिम कार्यक्रम में देशभर के साधु संत पहुंचे हुए थे। सन 1945 में जन्मे संत कवि पवन दीवान के कार्यों को देखकर लोग उन्हें छत्तीसगढ़ का गांधी  से अलंकृत किया था। सन 1977 में पहली बार  चुनाव लड़े और विधायक बनकर सीधे जेल मंत्री बनाए गए, उसके बाद दो बार महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसद रहे। डॉ. रमन सिंह की सरकार में गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाए गए। छत्तीसगढ़ निर्माण के आंदोलन में अपने आपको पहले पंक्ति में रखा। नतीजा 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होगा पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बना। भागवत कथा से इनकी प्रसिद्धि फैली और देखते ही देखते एक नाम चला कि पवन नहीं यह आंधी है छत्तीसगढ़ का गांधी है।

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