संवाददाता तुकाराम कंसारी
छात्रों ने जाना जनजातीय संस्कृति की धरोहर और अधिकार
@छत्तीसगढ़ लोकदर्शन, नवापारा राजिम। श्री कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय गोबरा नवापारा में “जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत – ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज की समृद्ध विरासत, कला, संस्कृति और समाज में उनके योगदान को सम्मानपूर्वक पहचान दिलाना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती जीना निषाद, अध्यक्ष महाविद्यालय जनभागीदारी समिति रहीं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अशोक गंगवाल (सांसद प्रतिनिधि) श्री ईश्वर देवांगन (सदस्य, जनभागीदारी समिति) सहित महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक एवं अतिथि व्याख्याता श्री जीतेन्द्र कुमार सिन्हा, श्री एस. आर. वड्डे, डॉ. प्रेमेंद्र कुमार उपाध्याय, श्री टिकेश्वर सिंह मरकाम सहित अन्य शिक्षक–कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मधुरानी शुक्ला ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी ऐसे सार्थक एवं चिंतनशील आयोजन निरंतर जारी रहेंगे।
जनजातीय जीवन: प्रकृति के संरक्षण का सतत संदेश
मुख्य वक्ता श्री महेश देव, अधिवक्ता एवं विधिक सलाहकार – कोल इंडिया रायपुर तथा जनजातीय सुरक्षा मंच से संबद्ध, ने अपने उद्बोधन में कहा कि —
> “जनजातीय जीवन प्रकृति पर आधारित है, और उनकी परंपराएँ पर्यावरण संरक्षण का सतत संदेश देती हैं।”
उन्होंने बताया कि जनजातीय समाज मानव सभ्यता का आदिम अध्याय है, जिसने दुनिया को सामूहिक जीवन, श्रम–सम्मान, कला–अभिव्यक्ति और समानता का आदर्श दिखाया है।
छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियों — गोंड, बैगा, हल्बा, कमार, मट्ठा, भतरा और पनिका — का उल्लेख करते हुए उनके इतिहास, लोकनृत्य, वाद्ययंत्र, धार्मिक आस्था एवं सामाजिक संरचना पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
अधिकारों, कानूनों और संविधान पर भी हुई चर्चा
श्री देव ने जनजातीय अधिकार, पेसा कानून, पारंपरिक वनाधिकार एवं संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा और समानता के प्रावधानों की जानकारी विद्यार्थियों को दी।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि —
> “शिक्षा जगत का दायित्व है कि वह जनजातीय संस्कृति को केवल शोध का विषय न मानकर सम्मान और संरक्षण के साथ आगे बढ़ाए।”
उनका व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक व प्रेरक रहा, जिससे छात्रों और शिक्षकों को नई दिशा मिली। उपस्थित अतिथियों ने कार्यशाला की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. अनीता साहा ने किया।








